Saturday, 4 April 2015

PM के डिनर में आने से जज का इनकार, मोदी को दी सेक्युलरिज्म की नसीहत

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस कुरियन जोसफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर शनिवार को उनके निवास पर आयोजित होने वाले डिनर में शामिल होने से इनकार कर दिया है। डिनर में सुप्रीम कोर्ट के जज, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। जस्टिस जोसफ ने प्रधानमंत्री को एक अप्रैल को लिखी चिट्ठी में ईसाई समाज के पर्व 'ईस्टर' का हवाला देकर डिनर में शामिल होने में असमर्थता जताई। उन्होंने चिट्ठी में लिखा, 'धार्मिक महत्व की छुट्टियों के दिन जरूरी कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। दिवाली, होली, दशहरा, ईद, बकरीद, क्रिसमस, ईस्टर महान पर्व हैं। आप खुद जानते हैं कि दिवाली, दशहरा, होली, ईद, बकरीद जैसे त्योहारों के मौके पर कोई भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता है।' उन्होंने लिखा, 'मैं जानता हूं कि इवेंट (डिनर और जजों की कॉन्फ्रेंस) को नए सिरे आयोजित करने का वक्त नहीं बचा है। लेकिन भारत की धर्मनिरपेक्षता का अभिभावक होने के नाते मैं आपसे निवेदन करता हूं कि ऐसे किसी भी कार्यक्रम का आयोजन करते हुए इन चिंताओं का भी ध्यान रखा जाए और सभी धर्मों के महत्वपूर्ण पर्वों के प्रति सम्मान दिखाया जाए। मैंने अपनी चिंता से भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश को भी अवगत कराया है।' शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वाले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज शनिवार को पीएम आवास पर आयोजित होने वाले डिनर में शामिल हो रहे हैं। जस्टिस कुरियन ने शुक्रवार को हुई कॉन्फ्रेंस पर एतराज जताया। गुड फ्राइडे शुक्रवार को था जबकि ईस्टर का पर्व रविवार को मनाया जाएगा।
भारत के सेक्युलर इतिहास का भी जिक्र 
जस्टिस जोसफ की ओर से पीएम को लिखी चिट्ठी में भारत के धर्मनिरपेक्ष इतिहास का जिक्र करते हुए कहा गया है कि भारत यहूदी और पारसी जैसे समुदायों के लिए सुरक्षित जगह रही है, जिन्हें विदेशों में धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया गया। जस्टिस जोसफ ने लिखा, 'ईरान पर जीत के बाद पारसियों पर अत्याचार हुए और उनके साथ भेदभाव हुआ तो वे भारत आ गए। भारत में पारसियों की तादाद दुनिया में सबसे ज्यादा है। शायद इसकी वजह यह रही होगी कि उस दौर के हिंदू शासकों ने न सिर्फ पारसियों को स्वीकार किया बल्कि उनकी सुरक्षा भी की।'
सर्व धर्म सम्भाव का सेक्युलरिज्म 
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस जोसफ कुरियन ने पीएम को भेजी चिट्ठी में लिखा, 'धर्मनिरपेक्षता का भारतीय मॉडल सर्व धर्म सम्भाव पर आधारित है। भारत में धर्मनिरपेक्षता सिर्फ धार्मिक सहिष्णुता नहीं है बल्कि यह सभी धर्मों को बराबरी के दर्जे पर आधारित है। महोदय, दुनिया सांप्रदायिक हिंसा झेल रही है और धर्म के नाम पर एक भाई दूसरे पर हमला कर रहा है।' जस्टिस जोसफ ने इस बात पर जोर दिया कि भारत धर्मनिरपेक्षता के मामले में दूसरे देशों के लिए आदर्श बने।
केरल में हैं जस्टिस जोसफ 
जस्टिस कुरियन जोसफ इस समय केरल में अपने परिवार के साथ हैं। जस्टिस कुरियन ने चिट्ठी में लिखा, 'गुड फ्राइडे हमारे लिए धार्मिक नजरिए से बहुत ही अहम दिन है। इस दिन यीशु मसीह को को सूली पर चढ़ाया गया था। मैं जजों के लिए आयोजित कॉन्फ्रेंस में इसी वजह से शामिल नहीं हो पाऊंगा क्योंकि इसका आयोजन गुड फ्राइडे के दिन हो रहा है।' जजों की कॉन्फ्रेंस का आयोजन शुक्रवार को किया गया था, जिसमें जस्टिस कुरियन शामिल नहीं हुए थे।

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