Sunday, 26 April 2015

नेपाल में 1910 लोगों की मौत, सुबह फिर लगे 6 झटके

दो ग्लोबमास्टर और 40 सदस्यीय टीम नेपाल पहुंचीनेपाल में शनिवार को कुदरती कहर ने जिंदगी को दहलाकर रख दिया। रिक्टर पैमाने पर 7.9 की तीव्रता वाले भूकंप ने दो मिनट के भीतर मौत और तबाही का ऐसा मंजर दिखाया कि दुनिया थर्रा गई। मकान ढहे, ऐतिहासिक धार्मिक इमारतें जमींदोज हुईं और देखते ही देखते सब कुछ तबाह हो गया। नेपाल में अब तक 1910 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें से 721 लोग केवल काठमांडू के हैं। वहीं दूसरी ओर, घायलों की संख्या 4,500 से भी अधिक हो गई है। फिलहाल नेपाल में 10 दिन की छुट्टी का ऐलान किया गया है।

भूकंप का असर आज भी देखने को मिल रहा है। कुछ टीवी चैनलों के अनुसार नेपाल में सुबह से अब तक भूकंप के करीब 6 झटके महसूस किए गए हैं, हालांकि इनकी तीव्रता अधिक नहीं थी। नेपाल से अब तक करीब 546 भारतीय लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। काठमांडू एयरपोर्ट भी खोल दिया गया है और विमान सेवाएं शुरू हो गई हैं। नेपाल में आए इस भूकंप से वहां का लोकप्रिय पशुतिनाथ मंदिर भी क्षतिग्रस्त हुआ है। मंदिर की बाहरी दीवारों को काफी नुकसान हुआ है।

हृदय विदारक तबाही के दृश्य हर ओर बिखरे दिखाई दिए। भारत भी इस तबाही से अछूता नहीं रहा। बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल में 51 लोगों की मौत हुई है, जबकि 237 लोग घायल हुए हैं। बिहार में सबसे अधिक 38 लोगों की मौत हुई। पड़ोसी देश में पिछले 81 सालों में आए इस सबसे भीषण भूकंप में सबसे अधिक तबाही काठमांडू में हुई है, जहां 300 से अधिक लोग मारे गए। नेपाल सरकार ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है।

भूकंप का केंद्र राजधानी काठमांडू से करीब 80 किमी पूरब में लामगंज में धरती के 10 किमी भीतर था। दोपहर से पहले 11:56 बजे आए इस भूकंप की ताकत का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि चीन, भूटान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के कई इलाकों में भी झटके महसूस किए गए।

बाद में भी 4.5 की तीव्रता से 16 से अधिक झटके महसूस किए गए। इससे पहले 1934 में नेपाल और बिहार में 8.4 की तीव्रता से भूकंप आया था। नेपाल के वित्त मंत्री राम शरन महत ने ट्वीट किया कि सेना ने अब तक 1457 मौतों का अनुमान लगाया है।
भारत सरकार ने आपदा की इस घड़ी में नेपाल को पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया है। भारत से 50 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम यहां पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा के कुछ ही समय बाद नेपाल के राष्ट्रपति राम बरन यादव और प्रधानमंत्री सुशील कोइराला से बात की। भारत सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन और डॉक्टरों की कई टीमें नेपाल भेजी हैं।

तबाही का मंजर देखने वाले काठमांडू में करीब दो सदी पुराना नौ मंजिला चर्चित धरहरा टावर ढह गया है। इस टावर में कई लोगों के दबे होने की आशंका है। इसके अलावा भक्तपुर में 150, सिंधू में 250, ललितपुर में 67 और ढाडिंग जिले में 37 लोगों के मरने की सूचना मिली है। नेपाल के पूर्वी इलाके में 20 और पश्चिमी इलाके में 33 लोग मारे गए हैं। माउंट एवरेस्ट पर हिमस्खलन में बेस कैंप तबाह हो गया है।

पांचवीं सदी के ऐतिहासिक पशुपति नाथ मंदिर में कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। शहर के कई अन्य प्रमुख मंदिर तबाह हो गए हैं। घनी आबादी वाले काठमांडू घाटी के अधिकतर पुराने मकान ढह गए हैं। यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर घोषित काठमांडू का प्रसिद्ध दरबार स्क्वायर इलाका पूरी तरह से तबाह हो गया है। तमाम इमारतें झुक गई हैं तो कई सड़कों में दरार पड़ गया है।

हर तरफ मलबे में दबे लोग और शव को देखकर मची त्राहि के बीच सड़कों पर भारी-भरकम पेड़ गिरे पड़े थे। नेपाल सरकार को दवाइयों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ रहा है। अस्पतालों के भीतर और बाहर घायलों का इलाज चल रहा है, जबकि तमाम जगहों पर शव बिखरे पड़े हैं। सेना, पुलिस और आपातकालीन सेवा के अधिकारी और जवान राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। भारत से आए 50 डाक्टर भी आपातकालीन सेवा में जुट गए हैं।
आपदा की इस घड़ी में नेपाल को हरसंभव मदद पहुंचाने में भारतीय वायुसेना जुट गई है। हिंडन वायु सेना अड्डे से दो सी-17 ग्लोबमास्टर और बठिंडा से एक ग्लोबमास्टर नेपाल भेजा गया है। इसके अलावा सी-130 जे सुपर हर्क्युलस विमान 40 सदस्यीय बचाव टीम और तीन टन राहत सामग्री के साथ नेपाल पहुंच गया है। रविवार को भारत विशेष इंजीनियरिंग टीमें भेजेगा। विदेश सचिव एस जयशंकर ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर मोबाइल हास्पिटल और मेडिकल टीमें भी भेजी जा रही हैं।

धरहरा टावर से निकाले गए 200 शव
काठमांडू के बीचोबीच स्थित ऐतिहासिक धरहरा टावर से कम से कम 200 शव निकाले गए हैं। इसमें अभी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। अपनी खूबसूरती के लिए चर्चित 19वीं सदी का यह 50 मीटर ऊंचा टावर कुछ ही क्षणों में मलबे में तब्दील हो गया। इसे 1832 में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री भीमसेन थापा ने बनवाया था। इस इमारत की वास्तुकला मुगल और यूरोपीय शैली की थी। टावर के ऊपर भगवान शिव की मूर्ति थी।

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