इस रेसिंग कार का निर्माण स्टूडेंट्स ने अपने डिपार्टमेंट इंजीनियर गौतम कोछड़ और स्टाफ इंचार्ज इंजीनियर हरकिरत सिंह की देखरेख में किया। स्टूडेंट्स ने इंटरनेट पर सर्च करने के साथ अध्यापकों से विचार करने के बाद रेसिंग कार को बनाया है। कार को लाइट वेट में तैयार किया गया है।
गाड़ी की चैसी एलोए स्टील पाइप से बनाए गई है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के मुख्य इंजीनियर गौतम कोछड़ ने कहा कि इस नई गो-कार्ट (रेसिंग कार) का साइज बाजार में पहले से मौजूद गो-कार्ट वाहनों के समान ही है पर इसका डिजाइन उनसे बिल्कुल अलग और नया है। गाड़ी का इंजन 190 सीसी है और इसकी कीमत सिर्फ 82 हजार रुपये है, जबकि रेसिंग कार की कीमत बाजार के मुताबिक 1.5 से तीन लाख रुपये के बीच है।
यह कार 250 किलोग्राम तक का वजन उठा सकती है और इसे छह फुट का व्यक्ति आराम से चला सकता है। इसकी रफ्तार 75 किमी प्रति घंटा है, जबकि दूसरी गो-कार्ट (रेसिंग कार) की स्पीड 50 किमी प्रति घंटा होती है। इस रेसिंग कार को तैयार करने वाली ड्रीम राइडर्स की टीम के सदस्यों में तरुणप्रीत (टीम लीडर), हरजोत, सुखविंदर, सोनू, सिमरजीत, गुरप्रीत, अनमोल, मोहित, रोहित, मनींद्र, बलजिंदर, नितिन, प्रभसिमरन और मयंक आदि शामिल हैं।
वाइस प्रिंसिपल इंजीनियर विक्रांत शर्मा ने कहा विद्यार्थियों ने भोपाल में आयोजित नेशनल गो कार्ट रेस में दूसरा स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में 16 राज्यों से 188 टीमों ने भागेदारी की थी। इस अवसर पर मीडिया विभाग के इंचार्ज गौरव खन्ना ने कहा कि इससे पहले सीटी के विद्यार्थियों ने ऐसी कार का निर्माण किया था, जो चार-सीटर थी मगर उसे पार्किंग के समय टू-सीटर कर दिया जाता था।
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