Thursday, 30 April 2015

नेपाल में पाक ने मदद के नाम पर भेजे बीफ मसाला पैकेट्स

pakistani beef masala packets के लिए चित्र परिणामकाठमांडू। भूकंप में तबाह हुए नेपाल की मदद के लिए दुनिया के कई देश सामने आए हैं, लेकिन पाकिस्तान द्वारा भेजी गई मदद से नेपाल में आक्रोश है। दरअसल, पाकिस्तान ने खाद्य सामग्री में बीफ (गोमांस) मसाले के पैकेट भेज दिए। इससे नेपाल सरकार सकते में है। नेपाल हिंदू बहुल देश है, जहां गाय को पवित्र माना जाता है। यहां गो-हत्या पर 12 साल की सजा का प्रावधान है। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी और टि्वटर पर #Beef भारत के टॉप ट्रेन्डिंग टॉपिक में आ गया। बता दें कि पाकिस्तान ने 28 अप्रैल को अपने दो C-130 एयरक्राफ्ट भेजे थे। जिसमें 250 टेंट, 2.6 टन खाना, एक हजार रेडी टू ईट मील्स, एक हजार कंबल और 33 मेडिकल कार्टन भेजे थे।
भारतीय डॉक्टर्स ने दी जानकारी 
काठमांडू स्थित बीर हॉस्पिटल में सेवाएं दे रहे राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से मंगलवार को पीड़ितों के लिए जो 'मील्स रेडी टू ईट' भेजे गए, उनमें बीफ मसाला पैकेट थे। डॉ. बलविंदर सिंह ने बताया कि हम जब एयरपोर्ट पर खाने की सामग्री लेने गए तो यह देखकर हक्के-बक्के रहे गए। हमने वे पैकेट्स वहीं छोड़ दिए और एक होटल में खाना खाने चले गए। उन्होंने बताया कि ये पैकेट्स स्थानीय लोगों में बांटा जा रहा है। अधिकांश नेपालियों को इसके बारे में पता नहीं है। जब उन्हें पता चलेगा तो वे भी इसे हाथ नहीं लगाएंगे।

नेपाल सरकार के पास पहुंचा मामला
इस मामले की जानकारी प्रधानमंत्री सुशील कोइराला और नेपाल के खुफिया प्रमुख को दे दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि हमने आतंरिक जांच शुरू कर दी है। अगर रिपोर्ट सही पाई जाती हैं तो इस मामले को राजनयिक चैनल के तहत पाकिस्तान के सामने उठाया जाएगा। उधर, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री भेजने के लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं। यह काम नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी करती है।


मामले में लोगों ने ट्वीट करके गुस्सा जाहिर किया।

...तो खत्म हो जाएगा इंसान का नामोनिशान, ये रहे 6 कारण

अंधाधुंध खननधरती के भीतर अक्षय ऊर्जा मौजूद है। इसके भीतर दबे खनिज लवण हमारी भलाई के लिए हैं। लेकिन स्वार्थ में अंधे होकर हम धरती का लगातार खनन कर रहे हैं जिसके चलते धरती खोखली हो रही है। 

कभी हम समुद्र से तेल निकाल रहे हैं तो कभी धरती से हीरा। कोयले और अन्य खनिजों को पाने के लिए हम रोज धरती का सीना छलनी कर रहे हैं। 

हम भूल गए हैं कि इन प्राकृतिक संसांधनों के चलते ही धरती उपजाऊ और हरियाली है। अगर इन रत्नों को पूरी तरह निकाल लिया गया तो धरती बांझ हो जाएगी। इस तरह बड़ी तादाद में खनन होता रहा तो आने वाले सालों में समुद्र के भीतर तेल की बूंद तक नहीं मिलेगी। खनिज लवण की बात की जाए तो लगातार खनन से इनकी भी कमी होने वाली है। जबकि यह जगजाहिर है कि धरती के उपजाऊपन को बनाए रखने में इन खनिज और लवणों का कितना योगदान है।

दूसरी खास बात ये है कि लगातार खनिज लवण निकाल कर हम आने वाली पीढ़ी के लिए धरती के भीतर कुछ नहीं छोड़ेंगे
वो दिन दूर नहीं जब स्वच्छ और ताजी सांस के लिए हमें टेक्स देना पड़े। दुनिया भर की हवा प्रदूषित होती जा रही है। चीन का उदाहरण ले लीजिए। यहां हर समय एक मटमैली धुंध सी छायी रहती है। सांस लेने के लिए ताजी हवा तक मुहैया नहीं।

हालात ये हैं कि चीन में कंपनियां फ्रेश एयर के नाम पर लोगों को डिब्बा बंद ताजी हवा बेच रही हैं। पैसे वाले लोग और विदेशी पर्यटक बाटल में पैक इस ताजी हवा को भारी दाम चुकाकर खरीद रहे हैं। लेकिन बाकी जनता का क्या होगा, ये सवाल ज्यों का त्यों है। 

चीन का वायु प्रदूषण दुनिया के बाकी देशों की तुलना में कई गुणा ज्यादा है। दरअसल विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक चीन की राजधानी बीजिंग में वायु प्रदूषण का स्तर सामान्य स्तर से पांच गुना ज्यादा है। पिछले साल 12 जनवरी को बीजिंग में वायु प्रदूषण 755 पीएम (वायु प्रदूषण को मापने का पैमाना) के स्तर तक जा पहुंचा था जो सामान्य स्तर से 10 गुना ज्यादा है। 


विश्व के सबसे ज्यादा वायु प्रदूषित शहरों में ईरान का अवहाज शहर पहले नंबर पर है। इस लिस्ट में दिल्ली के अलावा कानपुर और लुधियाना भी शामिल हैं। जबकि पाकिस्तान के क्वेटा और पेशावर जैसे शहरों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है।
यह जानते हुए भी कि पेड़ हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा हैं और इनसे निकलने वाली ऑक्सीजन से ही हमारी सांसे चलती हैं, हम अंधे होकर पेड़ काट रहे हैं।जंगल कम हो रहे हैं और उनके बदले उग रहे हैं कंक्रीट के जंगल। बढ़ती आबादी को खपाने के लिए जंगल, खेत खलिहान खत्म हो रहे हैं। जंगलों के कटने से एक तरफ वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी का कटाव भी तेजी से हो रहा है। 

एक ग्रीनपीस और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की तरफ से कराए गए सर्वे के अनुसार पिछले पांच दशक में अमेजन के जंगल 17 फीसदी कम हो चुके हैं।

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर मिनट में फुलबॉल की 36 फील्ड के बराबर जंगल नष्ट हो रहे हैं। जंगलों के कटने से एक तरफ भूक्षरण हो रहा है तो दूसरी तरफ सूखा पड़ रहा है।असंतुलित मौसम चक्र भी खेत खलिहान के हम होने का नतीजा है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार हमारी धरती पर अब 30 फीसदी वन क्षेत्र ही बचा है, जो अपने आप में एक खतरे की घंटी है। वनों की तबाही और इसके चलते वन्य जीवों के विलुप्त होने के यह आंकड़े बहुत भी भयानक हैं।

पिघलते ग्लेशियर
ये तस्वीर नार्वे के नजदीक सेवेलब्रेड आइसलैंड का है। इस आइसलैंड के ग्लेशियर कभी नहीं पिघले लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां बर्फ बहकर झरनों में तब्दील हो रही है।

दरअसल ग्लोबल वार्मिंग का असर ग्लेशियरों पर भी पड़ा है और मौसम में संतुलन पैदा करने वाले ये ग्लेशिय पिघलते जा रहे हैं। इससे समुद्र के स्तर में इजाफा हो रहा है और दुनिया रोज रोज समुद्री तूफानों और स‌ुनामियों को झेलने को अभिशप्त हो रही है।

नासा के मुताबिक उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर बर्फ पिघलने की रफ्तार प्रति दशक नौ फीसदी हो गई है। इतना ही नहीं आर्कटिक में बर्फ की मोटाई पिछले पचास सालों में 40 फीसदी कम हो गई है।

नेशनल स्नो एंड आईस डाटा सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व सर्वाधिक बर्फीले क्षेत्र यानी नार्वे, डेनमार्क और स्वीडन में पिछले तीन दशक में 20 फीसदी बर्फ गायब हो गई है।

यूएस सैंटर फॉर एटमॉसफेरिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग का यही दौर रहा तो 2040 तक आर्कटिक की बर्फ पूरी तरह गायब हो जाएगी।
अन्तरारष्ट्रीय स्तर पर चल रही बहस के मुताबिक अगला विश्वयुद्ध पेयजल को लेकर होगा। इस बात की बानगी कम हो रहे पेयजल और दूषित होती नदियां हैं जो गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है।

मानव जाति के लिए स्वच्छ पेयजल का सबसे अच्छा स्त्रोत मानी जाने वाली नदियों को इंसान ने खत्म कर डाला है। इनमें कूड़ा कचरा डाल कर, बांध बना कर इन्हें तबाह कर दिया है। हिमालय के हिमनदों से दक्षिण एशिया के कई देशों को पेयजल मिल रहा है और वैज्ञानिकों ने इन हिमनदों के 2050 तक गायब होने या सूखने की आशंका जाहिर की है। 

अपने ही देश का उदाहरण ले लीजिए, गंगा, यमुना, गंगोत्री और यमुनोत्री का पानी पीने लायक नहीं रहा। नदी किनारे बसे कारखानों का रसायनिक कचरा इन्हीं में बहाया जा रहा है। सड़ी गली लाशें तक इन नदियों में बहाई जा रही है। नदियों का जल इतना गंदा हो चुका है कि ये नालों में तब्दील होती जा रही हैं।

एक सर्वेक्षण के मुताबिक 1948 से लेकर 2005 तक विश्व की 925 बड़ी नदियां सूख चुकी हैं। इससे पेयजल की भयंकर कमी हुई है और बड़ी जनसंख्या वाले देशों में पेयजल की भयंकर कमी हो रही है और पानी को लेकर राज्यों में तनाव बढ़ रहा है।
तकनीक बढ़ रही है और इसका फायदा इंसान को हो रहा है। लेकिन यही तकनीक धरती को नुकसान पहुंचा रही है। धरती पर बढ़ रहा इलेक्ट्रोनिक कचरा प्रदूषण बढा रहा है। इससे निकलने वाले खतरनाक रसायन धरती की उम्र कम कर रहे हैं।प्लास्टिक यानी पॉलीमर की बात की जाए तो हालात और ज्यादा खतरनाक हैं।प्लास्टिक से बने सामान और पॉलीपेक ने डिस्पोजल संबंधी समस्या पैदा कर दी है।

पिछले पचास सालों से दुनिया में पॉलीबैग्स यानी प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल हो रहा है। इसका डिस्पोजल मुश्किल है औ इसी कारण ये धरती को नुकसान पहुंचा रहा है। समुद्री तटों पर मरे पाए जाने वाले जीव जंतुओं से पेट से प्लास्टिक निकल रहा है। मिट्टी में प्लास्टिक घुल नहीं पाता और इसलिए ये मिट्टी में जल के संचयन को रोक देता है। इसे जलाने पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक गैसें निकलती हैं। 

66 हजार रुपए तक सैलरी, भरिए इस नौकरी का फॉर्म

ऐसे करें आवेदनगार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजिनियर्स लिमिटेड ने रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए हैं। विज्ञापित पदों की कुल संख्या 25 है जिनमें महा प्रबंधक, अतिरिक्त महा प्रबंधक, उप महा प्रबंधक, वरिष्ठ प्रबंधक और कनिष्ठ प्रबंधक के पद शामिल हैं।

इन पदों को भरने की शैक्षिक योग्यता के तहत उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में परास्नातक डिग्री होना अनिवार्य है। अनुभव और आयु सीमा को पदों के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

वेतनमान के तौर पर कनिष्ठ प्रबंधक पद के आवेदकों को 12,600 से 32,500 रुपये, वरिष्ठ प्रबंधक के आवेदकों को� 29,100 से 54,500 रुपये, उप महा प्रबंधक के आवेदकों को 32,900 से लेकर 58,000 रुपये, अतिरिक्त महा प्रबंधक के आवेदकों को 36,600 रुपये से लेकर 62,000 रुपये और प्रबंधक पद के आवेदकों को 43,200 से लेकर 66,000 रुपये तक दिए जाने का प्रावधान है।
विज्ञापित पदों पर केवल ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक उम्मीदवार जीआरएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार सावधानीपूर्वक आवेदन करें।

भरे हुए आवेदन पत्र के प्रिंटआउट के साथ डिमांड ड्राफ्ट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न कर 'पोस्ट बॉक्स नंबर 3076, लोधी रोड, नई दिल्ली-110003' के पते पर भेजें। आवेदन शुल्क के तहत सामान्य व पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 300 रुपये व महिलाओं समेत आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए किसी प्रकार के शुल्क का प्रावधान नहीं किया गया है।

ऑनलाइन पंजीकरण करने की अंतिम तिथि 06 मई, 2015 निर्धारित की गई है। उम्मीदवार आवेदन करने के लिए या किसी अन्य जानकारी के लिए संबंधित वेबसाइट www.grse.nic.in पर लॉग ऑन करें।

भ्रष्टाचार पर मोदी का 'नया पहल ', आप भी जानिए

मोदी के लिए चित्र परिणामभ्रष्टाचार को गंभीर अपराध की श्रेणी में लाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक कानून में आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी दे दी। इसके तहत भ्रष्टाचार के मामलों में सजा की अधिकतम अवधि पांच साल से बढ़ाकर सात साल किए जाने का प्रावधान है।

भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 में प्रस्तावित संशोधनों में घूसखोरी के अपराध में रिश्वत देने और लेने वाले दोनों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। सजा के प्रावधानों को न्यूनतम छह महीने की बजाय तीन साल और अधिकतम पांच साल से बढ़ाकर सात साल किया गया है।

साथ ही नौकरशाही को काम करने की छूट देने के लिए अनजाने या गलती से लिए गए फैसलों से हुए नुकसान या गड़बड़ी जैसे मामलों के लिए अलग प्रावधान रखा गया है। भ्रष्टाचार के मामलों के जल्द निपटारे के लिए भी कानून में संशोधन किया गया है।

संशोधन में इस तरह के मामलों को निपटाने की दो साल की समय सीमा तय करने का प्रावधान है। यानी दो साल के भीतर मुकदमा खत्म करके इस तरह के मामलों को जल्द निपटाने का प्रस्ताव किया गया है। मंत्रिमंडल की ओर से बुधवार को मंजूर किए गए संशोधन भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक 2013 का हिस्सा होंगे, जो राज्यसभा में लंबित है।
भ्रष्टाचार से मिलने वाले होने वाले लाभ को रोकने के लिए संपत्ति की कुर्की का अधिकार अब जिला अदालतों के बजाय निचली अदालतों यानी विशेष न्यायाधीश को दिए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली कई बार कह चुके हैं कि 27 साल पुराना यह कानून ईमानदारी से फैसला लेने में बाधक है। उनका मानना है कि यह कानून परीक्षा पर खरा नहीं उतर पाया। खासकर यह कानून अलग अलग तरीकों से व्याख्या करने के लिए खुला हुआ है। इसमें भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की अलग अलग तरीके से व्याख्या करने की गुंजाइश छोड़ दी गई है।

सरकार का कहना है कि पिछले चार साल में भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों से जुड़े मामलों के निपटारे में औसतन आठ साल से अधिक समय लगा। इसलिए अब दो साल के भीतर मुकदमा खत्म हो, इसका प्रस्ताव रखा गया है। संशोधन में सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की ओर से किए जाने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए व्यक्तियों से लेकर कारोबारी संस्थाओं को प्रावधान के दायरे में लाया जा सकता है।
1. सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पेंशनभोगियों के लिए न्यूनतम पेंशन एक हजार रुपये निरंतर जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इससे करीब 20 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को तत्काल राहत मिलेगी।
2. आपदाओं से निपटने और राहत कार्यों को सुचारु ढंग से अंजाम देने के लिए एनडीआरएफ की बटालियन की संख्या बढ़ा दी गई है। कैबिनेट ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की दो अतिरिक्त बटालियन को एनडीआरएफ में परिवर्तित किए जाने को अपनी मंजूरी दी।
3. भारत-बांग्लादेश भू सीमा समझौते से संबंधित बिल को भी दी गई मंजूरी। इस समझौते से असम को बाहर रखने का फैसला किया गया है।
4. सरकार ने गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में नरमी लाने के बाद किसानों को एक और राहत प्रदान की है। सरकार ने बेमौसम बारिश से प्रभावित गेहूं की खरीद के समय किसानों से वसूली गई मूल्य कटौती को भी लौटाने का फैसला किया है।
5. घरेलू चीनी उत्पादकों को आयातित सस्ती चीनी से राहत देने के लिए सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी करने का निर्णय लिया है।

मोदी की दरियादिली, आप भी करेंगे सलाम

मकान ढहने से परेशान जलील का प्रदेश सरकार ने उड़ाया मजाकदरियादिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मदद ने प्रतापगढ़ के मुफलिस जलील को निहाल कर दिया। छह माह पूर्व घर गिरने से जलील बेहद परेशान था। मदद को प्रदेश सरकार से गुहार लगाई तो संकट से निपटने को उसे 1900 रुपये का चेक थमाकर उसकी मुफलिसी का मजाक उड़ाने जैसा काम किया गया।

परेशान जलील ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई तो पीएमओ से उसे 50 हजार रुपये का चेक भेजा गया। छह माह पूर्व आए तूफान ने जलील पुत्र जहीद निवासी बरिस्ता, तहसील सदर को पूरे परिवार के साथ सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया था।

इस आपदा में उसका रिहायशी मकान गिर गया। परिजनों के साथ रोते बिलखते हुए वह दो वक्त की रोटी के लिए परेशान था। मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर गुहार लगाई। इस पर उसके ऊपर आए संकट का आकलन करते हुए प्रदेश सरकार ने मात्र 19 सौ रुपये का चेक दिया। यह चेक उसके साथ हुए हादसे का जैसे मजाक उड़ा रहा था।
इस बीच उसकी मुलाकात कचहरी के अधिवक्ता अनिल सिंह से हुई। आपबीती सुनने के बाद अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जलील को आर्थिक मदद दिए जाने की गुहार लगाई। पत्र पर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राहत कोष से 50 हजार रुपये का चेक पीड़ित को भेजा है।

चेक के साथ भेजे पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा है कि मुझे पता है कि आपके ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है। बारिश-तूफान से आपका घर क्षतिग्रस्त हो गया है। आपको आर्थिक सहायता की जरूरत है।

इसलिए आपको प्रधानमंत्री विवेकाधीन कोष से पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। मैं कामना करता हूं कि आपको हर हालात का सामना करने की शक्ति मिले। पत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर भी हैं। चेक मिलने से पीड़ित और क्षेत्रीय लोगों में हर्ष व्याप्त है।

क्रिस गेल 500

गेल की 4 गेंदों की पारी और लगाया 'पंजा' शतकआईपीएल-8 के 29वें मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करने वाली रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर (आरसीबी) ने रनों का अंबार खड़ा करते हुए 200 रन बना डाले।

आरसीबी ने अपनी पारी की अंतिम गेंद पर 200 रन बनाए। 20-20 ओवर के मुकाबले में 200 रनों के आंकड़े को छूना बड़ी बात मानी जाती है। विराट कोहली की टीम ने 2010 के बाद पहली ऐसी टीम बन गई है जिसने राजस्‍थान रॉयल्स के खिलाफ 200 रन को छूने में सफलता हासिल की है।

टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले राजस्‍थान के गेंदबाजों के लिए आज का मैच अच्छा नहीं रहा और लगभग हर गेंदबाजों की धुनाई हुई। 43 साल के फिरकी गेंदबाज प्रवीण तांबे जो अब तक टीम के कीफायती गेंदबाजों में गिने जाते थे आज काफी महंगे साबित हुए। उन्हें 3 ओवर डालने का मौका मिला लेकिन एक भी सफलता हासिल किए बगैर ही 39 रन लुटा दिए।

यह प्रवीण के टी-20 करियर का सबसे महंगा स्पेल रहा। इससे पहले उन्होंने एक मैच में सबसे ज्यादा 38 रन लुटाए थे। सिर्फ प्रवीण ही नहीं बल्कि अन्य गेंदबाजों की भी जमकर धुनाई हुई। जेम्स फॉकनर ने 2 ओवर में 26 रन दे डाले।
रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर (आरसीबी) ने पहले बल्लेबाजी करने का मौका मिलने के बाद शुरुआती झटकों के बीच जोरदार शुरुआत की और पावरप्ले में 52 रन अपने नाम जोड़ लिए। उनका यह प्रदर्शन इस सत्र का सबसे शानदार प्रदर्शन है।

कप्‍तान विराट कोहली के साथ पारी की शुरुआत करने क्रिस गेल (10) मैदान पर आए और वह टिम साउदी की पहली गेंद पर खाता नहीं खोल सके लेकिन अगली गेंद पर चौका जड़ दिया। फिर तीसरी गेंद पर उन्होंने लॉंग ऑफ पर छक्का जड़ दिया। हालां‌कि वह चौथी गेंद पर कैच आउट हो गए। मैच में वह भले ही 4 गेंद खेल सके लेकिन अपनी इस बेहद छोटी सी पारी में भी उन्होंने एक मुकाम अपने नाम कर ही लिया।

गेल ने आज एक छक्‍का भी लगाया और इसी छक्के के दम पर वह टी-20 क्रिकेट में अपने 500 छक्के पूरे कर लिए। वह यहां तक पहुंचने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पीछे उनके हमवतन कीरोन पोलार्ड हैं जो आईपीएल में मुंबई इंडियंस की ओर से खेलते हैं और अब तक 348 छक्‍का जमा चुके हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो दोनों के लगाए छक्के में काफी अंतर है और गेल का दबदबा अभी लंबे समय तक बना रहेगा।

क्रिस गेल की टीम के विस्फोटक बल्लेबाज एबी डीविलियर्स (57) ने आज अर्धशतकीय पारी खेली। तेज बल्लेबाजी के पर्याय बन चुके डीविलियर्स ने आज 41 गेंदों में फिफ्टी पूरी की जो आईपीएल में उनकी सबसे धीमी अर्धशतकीय पारी है।

Wednesday, 29 April 2015

जल सत्याग्रह: पैरो से खून रिसने के बावजूद जोश बरक़रार



खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पिछले 17 दिन से पानी में रहकर जल सत्याग्रह कर रहे सत्याग्रहियों के पैरों की खाल गल रही है, खून रिस रहा है और मछलियां उसे अपना निवाला बनाए जा रही हैं, मगर सत्याग्रहियों का जोश बरकरार है।
वहीं चिकित्सकों के एक दल ने सोमवार को सत्याग्रहियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। खंडवा जिले में नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 189 मीटर से बढ़ाकर 191 मीटर कर दिया है, इसके चलते कई खेत पानी में डूब चुके हैं तो कई खेतों की ओर पानी बढ़ रहा है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ किसान और नर्मदा बचाओ आंदोलन के सदस्य 11 अप्रैल से घोगलगांव में जल सत्याग्रह कर रहे हैं।
जल सत्याग्रह किए जाने से खेत पानी से डूब रहे हैं और सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो चला है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नर्मदा बचाओ आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलज़क अग्रवाल ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि पुर्नवास नीति का राज्य में पालन नहीं हो रहा है, प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा है, किसान आज अपना हक पाने के लिए आंदोलन किए जा रहे हैं तो उसका सरकार मजाक उड़ाने पर लगी हुई है। अग्रवाल ने कहा कि किसानों के पैर गल रहे हैं, खून रिस रहा है, मगर सरकार के कान में जू नहीं रेंग रही है।
सरकार अपनी जिद पर अड़ी है, मगर उसे किसानों की समस्या को देखने की फुर्सत नहीं है। सत्याग्रहियों के स्वास्थ्य का परीक्षण करने चिकित्सकों का दल घोगलगांव पहुंचा। चिकित्सकों ने सत्याग्रहियों को परामर्श दिया है कि वे अपना इलाज कराएं, मगर सत्याग्रही इसके लिए तैयार नहीं हुए। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान साफ कर चुके हैं कि बांध का जलस्तर बढ़ाया जा चुका है, उसे किसी भी कीमत पर कम नहीं किया जाएगा।
वहीं सरकार की ओर से सोमवार को एक बयान जारी किया गया है, जिसमें 23 अप्रैल को हुई नर्मदा घाटी विभाग के राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य के साथ भोपाल में हुई आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों की बैठक का ब्योरा दिया गया है। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्यमंत्री ने आंदोलनकारियों से जलाशय से हटने की अपील की तो आंदोलनकारी जलाशय खाली करने पर अडे़ रहे।

सौरभ गांगुली के क्रिकेट करियर पर नई किताब

sourav ganguly के लिए चित्र परिणामकोलकाता
भारतीय क्रिकेट टीम के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में शुमार सौरभ गांगुली के करियर के नए आयामों को उनके चाहने वालों के सामने खोलने वाली एक नई किताब का यहां अनावरण हुआ। गांगुली के धुर प्रशंसक तथा एक आईटी कंपनी में काम करने वाले डिजिटल मार्केटिंग में विशेषज्ञ सप्तर्षी सरकार ने यह पुस्तक लिखी है।

'सौरभ गांगुली : क्रिकेट, कैप्टेंसी ऐंड कंट्रोवर्सी' शीर्षक वाली इस पुस्तक में एक क्रिकेट खिलाड़ी के तौर पर गांगुली के जीवन के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। गांगुली के गृह-नगर कोलकाता के ही रहने वाले सरकार ने कहा, 'यह पुस्तक एक व्यक्ति के क्रिकेट के साथ उसके संबंधों की पड़ताल करती है। मैं 'वीलवसौरभ डॉट कॉम' यूआरएल से एक वेबसाइट चलता हूं, जहां मैं दादा (सौरभ) के जीवन से जुड़ी रोचक बातें प्रसारित करता हूं।'

सरकार ने कहा, 'मेरी वेबसाइट पर सौरभ की ये कहानियां पढ़ने वाले पाठकों ने ही मुझे सौरभ के जीवन पर एक किताब लिखने के लिए कहा। जब मुझे लगा कि मेरे पास एक पुस्तक की रचना करने के लिए पर्याप्त सामग्री इकट्ठी हो गई है तो मैंने उसे प्रकाशित करने का निर्णय किया।' इस पुस्तक में सौरभ के क्रिकेट करियर से जुड़ी कई विवादित घटनाओं का भी जिक्र है, खासकर भारतीय टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल के साथ उठा विवाद।

पुस्तक के अनावरण के अवसर पर गांगुली के बचपन के कोच अशोक मुस्तफी, पूर्व खिलाड़ी राजू मुखर्जी और गोपाल बासु भी उपस्थित थे। हालांकि इस अवसर पर खुद गांगुली व्यस्तता के चलते शामिल नहीं हो सके।

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