नई दिल्ली : दिल्ली सरकार के क़ानून मंत्री की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। फर्जी डिग्री के मामले में अब 'आप' तोमर से छुट्टी पाने के मूड में आ गई है। सू्त्रों के अनुसार दोपहर बाद 1 बजे मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ख़ास लोगों की बैठक बुलाई है। तोमर को हटाए जाने के संकेत मिल रहे हैं। उनकी जगह करावल नगर के विधायक कपिल मिश्र का नंबर लग सकता है।
इससे पहले सोमवार को तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि तोमर द्वारा एलएलबी में दाखिला लेने के लिए विश्वविद्यालय में प्रस्तुत किए गए स्नातक के प्रोविजनल सर्टिफिकेट और विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में तोमर नाम से ऐसा कोई सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया गया है।
न्यायमूर्ति राजीव शकधर की खंडपीठ के समक्ष बिहार स्थित तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के निरीक्षक मनिन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए प्रोविजिनल सर्टिफिकेट की जांच की गई।
इसमें पता चला है कि तोमर ने 18 मई, 2001 को रजिस्ट्रार राजेंद्र प्रसाद सिंह के हस्ताक्षर से जारी प्रोविजनल सर्टिफिकेट नंबर 3687 को अपना दिखाया है। इसमें तोमर को द्वितीय श्रेणी में पास दिखाया गया है लेकिन अवध विश्वविद्यालय से इस नंबर का प्रमाणपत्र तोमर को नहीं बल्कि 29 जुलाई, 1999 को किसी अन्य संजय कुमार चौधरी को बीए आनर्स राजनीति विज्ञान की परीक्षा के लिए जारी किया गया है।
इतना ही नहीं, यह प्रमाणपत्र राजेंद्र प्रसाद के हस्ताक्षर से नहीं बल्कि डॉ. मो. गुलाम मुस्तफा के हस्ताक्षर से जारी किया गया था, जिससे स्पष्ट होता है कि प्रमाणपत्र फर्जी है और जाली हस्ताक्षर से बनाया गया था। निरीक्षक ने बताया कि तोमर ने खुद को लॉ डिग्री धारक दिखाते हुए बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) से पंजीकृत करवाया और स्वयं को हाई कोर्ट में बतौर अधिवक्ता कार्यरत दिखाया है। यह सब मनगढ़ंत है। उन्होंने कहा कि तोमर को कभी भी प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया। कोर्ट ने मामले में अवध विश्वविद्यालय से भी जवाब मांगा है।
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