इस बीच, सुरक्षित बचे पर्वतारोहियों द्वारा सोशल साइट्स पर अपलोड की गई तस्वीरों में एवरेस्ट के दक्षिण हिस्से पर स्थित बेस कैंप पर मलबे में दबे टेंट और बर्फ के बड़े-बड़े टुकड़े दिखाई दे रहे हैं।
नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के ज्ञानेंद्र श्रेष्ठ ने काठमांडू में बताया कि ‘हताहतों की तादाद बढ़ने की आशंका है। इसमें कई विदेशी और शेरपा (नेपाली गाइड) शामिल हो सकते हैं।’
हादसे की खबर मिलते ही भारतीय सेना की एक टुकड़ी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप 1 और 2 के लिए रवाना हुई और पर्वतारोहियों को बचाने का काम शुरू कर दिया गया। करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर 13 लोगों के शव बरामद किए गए हैं।
अप्रैल का महीना एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। मई के अंत तक हिमालय के पर्वतीय अंचल में बादल घिरने लगते हैं और बारिश की संभावना बढ़ जाती है। पिछले साल भी अप्रैल महीने में एवरेस्ट बेस कैंप में हुए भूस्खलन में 16 नेपाली शेरपा मारे गए थे।
पर्वतारोहीे @ ट्विटर
एवरेस्ट पर ‘बड़ा हिमस्खलन’। बहुत सारे लोग शिखर पर चढ़ रहे हैं। मैं जान बचाने के लिए अपने टेंट से भाग रहा हूं।
-एलेक्स गेवेन, रोमानियाई पर्वतारोही
एवरेस्ट पर अभी एक बड़ा भूकंप आया है। बेस कैंप ‘बुरी तरह क्षतिग्रस्त’ हुआ है। हमारी टीम कैंप 1 में फंसी हुई है। कृपया सभी के लिए दुआ करें।
- डेनियल मेजर, अमेरिकी पर्वतारोही
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