पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई थी कि गला काटकर हत्या करने से पहले उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। घटना के बाद घाटी में जमकर बवाल हुआ था।
पुलिस ने जांच के बाद चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें दो घाटी तथा दो बाहर के थे। पूछताछ में इन्होंने अपना जुर्म कबूल किया था। चारों ने कोर्ट में माफी की गुहार लगाई थी।
जिन लोगों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है उनमें लंगेट के साकिब मीर व अजहर मीर तथा बढ़ई का काम करने वाले पश्चिम बंगाल के जहांगीर बिहारी एवं सुरेश मोची शामिल हैं।
इन लोगों ने कुपवाड़ा के प्रमुख सत्र न्यायाधीश मोहम्मद इब्राहिम वानी के समक्ष माफी की गुहार लगाई थी। अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि इनके द्वारा किए गए घिनौने अपराध के लिए कोई सहानुभूति नहीं है।
कई अपराध इतने अपमानजनक होते हैं कि उसके लिए समाज की ओर से भी सख्त से सख्त सजा की मांग की जाती है। सरकारी वकील जीएम शाह ने बताया कि अपराधियों के समक्ष हाईकोर्ट में अपील के लिए तीन महीने का समय है।
उम्मीद है कि उच्च न्यायालय भी इस फैसले को कायम रखेगा। कोर्ट के फैसले से छात्रा के परिजन काफी खुश नजर आए। वे शुरू से ही मृत्यु दंड की मांग कर रहे थे।
छात्रा के भाई का कहना था कि सही इंसाफ तब मिलेगा जब इन दरिंदों को फांसी पर चढ़ाया जाएगा।
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