राजीव चौक मेट्रो स्टेशन का नाम पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर नहीं बल्कि राजीव गोस्वामी के नाम पर पड़ा है। राजीव गोस्वामी मंडल कमिशन द्वारा लाए गए नौकरी में आरक्षण के खिलाफ बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाला छात्र था।
मेट्रो में यात्रा करते वक्त जो उद्घोषणाएं होती उन्हें सुनकर आपके मन में भी ये खयाल तो जरूर आता होगा कि ये किनकी आवाजें हैं। ये आवाजें अपने जमाने के मशहूर दूरदर्शन के एंकरों की आवाजें हैं। अंग्रेजी में रिनी सीमॉन नाम की उद्घोषक और हिंदी में शम्मी नारंग की आवाज आप सुनते हैं।
इसके साथ ही डीएमआरसी सलाम बालक नाम का एनजीओ भी चलाता है जिससे सड़क पर रहने वाले छात्र एक बेहतर भविष्य बना सकें।
मेट्रो सिस्टम को पूरी तरह से विकलांग लोगों की सुविधा के अनुसार बनाया गया है। स्टेशनों की लिफ्ट में ब्रेल बटन हैं और इन्हें इतना नीचे लगाया गया है कि व्हील चेयर पर बैठकर भी इन्हें चलाया जा सके। इसके साथ ही पीली पट्टियां नेत्रहीनों के लिए ही बनाई गई हैं।
आपको आश्चर्य होगा कि किराया न बढ़ाने के कारण होने वाले नुकसान के लिए रोने वाली भारतीय रेलवे के मुकाबले मेट्रो कहीं बेहतर है। मेट्रो ने 2009 से कोई किराया नहीं बढ़ाया है लेकिन वह मुनाफा कमा रही है। जबकि इसका ऑपरेशन कॉस्ट लगातार बढ़ता जा रहा है। 2011 में इसका लाभ 767.66 करोड़ था जो 2014 में बढ़कर 1062.48 करोड़ हो गया।
मीनाक्षी शर्मा, अंजलि मिंज और विभा कुमारी मेट्रो की पहली महिला ऑपरेटर्स हैं।
जहां भारतीय रेल का देरी का अपना रिकॉर्ड है वहीं दिल्ली मेट्रो का पंक्चुअलिटी का 99.7% रिकॉर्ड है। यह बहुत बड़ा रिकॉर्ड है।
दिल्ली मेट्रो हर साल 700 मिलियन यात्रियों को सवारी करवाती है जोकि यूएस की पूरी जनसंख्या से भी अधिक है।
2014 में दिल्ली मेट्रो को विश्व स्तर पर सबसे प्रसिद्ध मेट्रो सिस्टम में दूसरा स्थान मिला था। पहला स्थान न्यूयॉर्क मेट्रो को मिला था।
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