'नेपाल से 32 गुना अधिक शक्तिशाली भूकंप आ सकता है'
भूगर्भ वैज्ञानिक जेके बंसल ने कहा कि नेपाल से 32 गुना अधिक शक्तिशाली भूकंप के आने की आशंका अभी हिमालय और उसके आसपास के इलाकों में बनी है। विशेषज्ञों की मानें तो दिल्ली की अधिकांश बिल्डिंग्स को बनाने में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं हुआ है। ये बिल्डिंग्स 7 रिक्टर से ज्यादा भूकंप सहन नहीं कर सकती हैं। अगर वैज्ञानिकों का अनुमान सटीक निकला तो भारत में तबाही का अंदाजा लगाना मुश्किल होगा। मौसम विभाग के डायरेक्टर एल एम राठौड़ ने लोगों को बारिश और भूस्खलन वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।
नहीं निकल पा रहा कोई हल
भूकंप आने से हफ्ते भर पहले नेपाल का दौरा करने वाले वैज्ञानिकों की टीम को यह एहसास नहीं था कि जिस भयावह आपदा का वो अनुमान लगा रहे हैं वह इतनी जल्दी आ जाएगी। वैज्ञानिक प्रयास कर रहे हैं कि कोई ऐसा तरीका तलाशा जाए जिससे भूकंप के आने की संभावना का पता लगाया जाए, लेकिन अभी इसमें कोई कामयाबी नहीं मिली है।
हर साल 5 MM ऊपर उठ रहा हिमालय, इसीलिए आते हैं भूकंप
नेपाल में शनिवार को आए भूकंप से भारी तबाही हुई है और इसे 1932 के बाद सबसे बड़ा भूकंप माना जा रहा है। नेपाल में भूकंप आते रहते हैं और इसीलिए उसे दुनिया से सबसे ज़्यादा भूकंप संभावित इलाकों में एक माना जाता है। बीबीसी के अनुसार इस क्षेत्र में पृथ्वी की इंडियन प्लेट (भारतीय भूगर्भीय परत) यूरेशियन प्लेट के नीचे दबती जा रही है और इससे हिमालय ऊपर उठता जा रहा है। हर साल लगभग पांच सेंटीमीटर ये प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे जा रही है और इससे हर साल हिमालय पांच मिलीमीटर ऊपर उठता जा रहा है। इससे चट्टानों के ढांचे में एक तनाव पैदा हो जाता है। जब ये तनाव चट्टानों के बर्दाश्त के बाहर हो जाता है तो ये भूकंप आता है।
एवरेस्ट हिला, 2 बेस कैंप ध्वस्त
एवरेस्ट बेस कैंप के पास हिम-स्खलन हुआ। इसमें 18 लोगों की मौत हो गई। बेस कैंप नंबर 1 और 2 नष्ट हो गए हैं। भारतीय पर्वतारोही अर्जुन वाजपेयी ने बताया कि कुछ टीमें फंसी हो सकती हैं। 700 पर्वतारोही एवरेस्ट के इलाके में हैं। फोन बंद होने से उनका पता नहीं चल रहा है।
एवरेस्ट बेस कैंप के पास हिम-स्खलन हुआ। इसमें 18 लोगों की मौत हो गई। बेस कैंप नंबर 1 और 2 नष्ट हो गए हैं। भारतीय पर्वतारोही अर्जुन वाजपेयी ने बताया कि कुछ टीमें फंसी हो सकती हैं। 700 पर्वतारोही एवरेस्ट के इलाके में हैं। फोन बंद होने से उनका पता नहीं चल रहा है।
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