मोबाइल फोन की लोकेशन और कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने कई बड़े अपराधियों को पकड़कर केस सुलझाए हैं। हाल ही वाट्सऐप कॉलिंग शुरू की गई है। इसमें मोबाइल की लोकेशन तो आती है, लेकिन फोन किसे किया गया और उसमें क्या बातचीत की गई है इसका पता लगाना मुश्किल है। इसके चलते अपराधियों के इसका उपयोग करने की आशंका बढ़ गई है। वाट्सऐप का सर्वर अमेरिका में होने के कारण पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां को कॉल डिटेल मिलना मुश्किल होगी। इस कारण सुरक्षा एजेंसियां इसे सुरक्षा के लिए खतरा मान रही है। वाट्सऐप कॉलिंग के माध्यम से बाहरी देश में बैठा संदिग्ध व्यक्ति देश में संदिग्ध गतिविधियों को संचालित कर सकता है।
पांच मुख्य बातें
> कॉलिंग रिकॉर्ड नहीं होने के कारण कोई भी रिश्वत खोर रिश्वत के बारे में बात वाट्सऐप काॅलिंग के माध्यम से करेगा।
> विदेश में बैठे आतंकी भारत में संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों से वाट्सऐप कॉलिंग के माध्यम से आसानी से बात कर सकेंगे।
> वाट्पऐप कॉलिंग होने पर साइबर कैफे जाने या कंप्यूटर पर बैठने की जरूरत नहीं होगी। इससे कहीं भी कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी भी वाट्सऐप नंबर पर बात कर सकेगा।
> सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई दुविधा खड़ी हो रही है कि वे टैररिस्ट की संदिग्ध गतिविधियों की सूचनाएं, उनकी कॉल से मिलने वाले सुराग लेने में काफी लंबा समय लगेगा।
> अब तक सुरक्षा एजेंसियों काे देश में मोबाइल फोन संचालित करने वाली कंपनियां जल्दी ही डेटा उपलब्ध करवा देती है लेकिन व्हाट्सऐप कॉलिंग का डेटा लेना मुश्किल होगा।

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