Friday, 10 April 2015

मांझी का बड़ा दाँव : नीतीश से किसी भी शर्त में दोस्ती नही|



पटना : जनता परिवार के महाविलय पर मांझी गुट के नेता व पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि यह 'महाविलय' नही 'महाप्रलय' है. बिहार को सर्वनाश के कगार पर ले जाने वाले लोग फिर एक जगह आ रहे हैं| सिंह ने सासाराम में अगाह किया कि बिहार की जनता के लिए यह खतरनाक है इसलिए जनता को संभल जाना चाहिए।
इससे पहले मांझी गुट में शामिल विधायक राजीव रंजन ने गुरुवार को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर विलय का विरोध किया था. राजीव रंजन ने चुनाव आयोग से जदयू के चुनाव चिह्न और झंडे की मांग की थी. पत्र में कहा गया है कि कई विधायक विलय के विरोधी हैं. संविधान के मुताबिक अगर एक भी विधायक विलय के विरोधी हों तो वे मूल पार्टी में रह सकते हैं. राजीव रंजन के मुताबिक, जदयू के कई विधायक इस विलय के खिलाफ हैं. ऐसे में चुनाव आयोग को इन विधायकों को जदयू का चुनाव चिह्न और झंडा उपयोग करने का अधिकार दे देना चाहिए.
ध्यातव्य है की मांझी समेत उनके खेमे के सभी विधायक विलय के पक्ष में नहीं हैं. कुल मिलाकर मांझी गुट ने अपना सबसे बड़ा दांव खेल दिया है. अगर राजद-जदयू और समाजवादी पार्टी समेत पुराने जनता परिवार के सभी 6 दलों का विलय होता है तो जनता परिवार का चुनाव चिन्ह और नाम बदलेगा. ऐसी हालत में अगर चुनाव आयोग मांझी गुट की मांग को मान लेता है तो जनता दल यूनाइटेड का नाम और चुनाव चिन्ह दोनों ही मांझी खेमे के पास रहेंगे.

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