Wednesday, 8 April 2015

राफेल के साथ गतिरोध बरकरार, यूरोफाइटर देगा सेना को नया प्रस्ताव

नई दिल्ली। भारत के साथ फ्रांस के मध्यम रेंज बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान राफेल के सौदे को लेकर गतिरोध बरकरार रहने के संकेतों के बीच राफेल के प्रतिद्वन्द्वी \'यूरोफाइटर\' का कंसोर्टियम अपने प्रस्ताव को लेकर भारत के साथ बातचीत को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फ्रांस, जर्मनी, कनाडा की यात्रा के सिलसिले में जर्मनी के राजदूत माइकल स्टीनर ने आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यूरोफाइटर का कंसोर्टियम अपने प्रस्ताव के साथ एकदम तैयार है। कंसोर्टियम के सभी सदस्य देश इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और उनका मानना है कि यह प्रस्ताव गुणवत्ता और कीमत दोनों के हिसाब से बिल्कुल ठीक है।

स्टीनर ने कहा कि हम भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया का सम्मान करते हैं। फ्रांस के साथ 126 राफेल विमानों की खरीद का मामला कई सालों से अटका रहने के कारण इसकी कीमत 12 अरब डॉलर से बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुँच गई है। इस सौदे में 18 विमानों की सीधी आपूर्ति और बाकी विमानों के भारत में निर्माण किये जाने को लेकर राफेल ने कीमत बढ़ाई है। दोनों देशों के बीच भारत में निर्माण के दौरान गारंटी के मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं। फ्रांस के राजदूत फ्रांस्वा रिशीर ने कहा कि मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान इस सौदे पर दोनों देशों के बीच बातचीत होनी है। हालाँकि उन्होंने मोदी की यात्रा के दौरान इस बारे में कोई सहमति बन पाने और गतिरोध टूटने को लेकर कोई उम्मीद नहीं जताई।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत जारी है लेकिन कोई करार होने की संभावना पर कुछ नहीं कहा जा सकता। वर्ष 2007 में वैश्विक निविदा के जरिये शुरू हुई खरीद प्रक्रिया में 2012 में अमेरिका, यूरोप और रूस के प्रस्तावों को खारिज करके राफेल खरीदने का फैसला हुआ था। यूरोप के यूरोफाइटर टाइफून विमान को ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन का एक संयुक्त कंसोर्टियम बनाता है। जबकि राफेल को फ्रांस की डसौल्ट कंपनी बनाती है।

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