महीना भर पहले तक लोकप्रियता की बुलंदी पर रही आम आदमी पार्टी और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल की छवि पर पार्टी में चल रहे घमासान ने तगड़ी चोट की है.
ऐसा अमूमन नहीं होता कि चुनावों में बुलंदी पर रही किसी पार्टी की लोकप्रियता सरकार बनने के दो महीने के भीतर ही रसातल को जाती दिखे. लेकिन प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी के साथ ऐसा ही होता दिख रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स और सी फोर के एक सर्वे को आधार मानें तो बीते एक महीने के दौरान घटी घटनाओं ने आप और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल की छवि पर तगड़ी चोट की है.+
क्या आप में मचा यह घमासान केजरीवाल सरकार की छवि खराब कर रहा है, यह पूछने पर 83 फीसदी ने हां में जवाब दिया.
अक्सर सर्वे यह जानने के लिए होते हैं कि चुनाव में मतदाता क्या मन बना रहा है. लेकिन इस अलग से सर्वे में यह जानने की कोशिश की गई है कि वह मतदाता क्या सोच रहा है जिसने हाल ही में असाधारण लोकप्रियता के साथ एक नई पार्टी की सरकार बनती देखी है और जो अब यह देख रहा है कि वही पार्टी काम से ज्यादा अपनी गुटबाजी और टकराव के लिए सुर्खियां बटोर रही है.+
आप में हुए इस टकराव का जिम्मेदार कौन था, इस सवाल के जवाब में करीब दो तिहाई लोगों का मानना था कि इसकी वजह केजरीवाल या उनके समर्थक थे. 37 फीसदी लोगों ने अरविंद केजरीवाल का नाम लिया. 25 प्रतिशत लोगों ने कहा कि झगड़े की वजह केजरीवाल के समर्थक थे. 16 फीसदी लोगों ने प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को जिम्मेदार माना तो 13 फीसदी ने इसका ठीकरा सब पर फोड़ा. नौ प्रतिशत का जवाब था कि वे कुछ कह नहीं सकते.+
ज्यादातर लोगों का मानना था कि इस विवाद से अब तक एक अलग छवि बनाने में सफल रही पार्टी की भद्द पिट रही है. क्या आप में मचा यह घमासान केजरीवाल सरकार की छवि खराब कर रहा है, यह पूछने पर 83 फीसदी ने इसका जवाब हां में दिया. छह प्रतिशत लोगों का जवाब न में था जबकि 11 फीसदी ने कहा कि वे कुछ नहीं कह सकते. जब लोगों से यह पूछा गया कि क्या अरविंद केजरीवाल आप को एक नेता केंद्रित पार्टी बनाने की कोशिश कर रहे हैं तो 55 फीसदी लोग इस पर सहमत थे. 21 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नहीं. 24 फीसदी लोग कुछ कह नहीं सकते वाली श्रेणी के थे. क्या आप के ये आपसी झगड़े उन चुनावी वादों से ध्यान भटका रहे हैं जो पार्टी ने दिल्ली के लोगों से किए थे? 70 फीसदी लोगों ने इसका जवाब हां में दिया. 23 फीसदी लोगों का मानना था कि ऐसा नहीं है. सात फीसदी लोगों ने कहा कि वे कुछ कह नहीं सकते.+
बीते एक महीने के दौरान केजरीवाल सरकार के काम को आप कैसे आंकते हैं, इस सवाल के जवाब पर छह फीसदी लोगों ने कहा कि बहुत ही अच्छा. 22 फीसदी लोगों ने इसे अच्छा बताया. 34 प्रतिशत के मुताबिक यह औसत रहा जबकि 17 फीसदी का कहना था कि केजरीवाल सरकार का रिकॉर्ड खराब रहा है. 21 फीसदी की इस पर कोई राय नहीं थी.+
यह सर्वे दिल्ली में 28 मार्च को किया गया. इस समय तक आप में हो रहा घमासान चरम पर पहुंच गया था. सर्वे के दौरान 2036 लोगों से सवाल किए गए.
No comments:
Post a Comment