बुक्सानी ने कहा कि यह मांग ऐसे समय की गई है जब समुदाय को डर है कि अलग राच्य नहीं होने पर सिंधियों की अपनी कोई पहचान नहीं होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सिंधियों के लिए पृथक सिंधी भाषी राज्य के गठन पर विचार करने की अपील की, ताकि समुदाय गर्व से कह सके कि उनके पास भारत में अपनी जमीन है।
हाल में शहर के दौरे पर आए बुक्सानी ने कहा कि सिंधी सात हजार साल पुरानी मोहनजोदड़ो सभ्यता के वंशज हैं और वे विलुप्त होने के कगार पर हैं क्योंकि उनको कोई अपना राच्य और अलग पहचान नहीं है। अलग सिंधी भाषी राज्य की जरूरत को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि भारत में राजस्थान और गुजरात के कच्छ में ऐसे क्षेत्र हैं जहां आज भी लोग सिंधी बोलते हैं और बंटवारे से पहले की सिंध वाली संस्कृति अपनाए हुए हैं।
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