Monday, 20 April 2015

तांगेवाले की बेटी बनी फुटबॉल टीम की कैप्टन

अंडर-14 गर्ल्स टीम में है सोनीबिहार की सोनी कुमारी शनिवार 20 अप्रैल से काठमांडु में शुरु हो रहे एशियन फुटबॉल कप में भारतीय टीम की कमान संभालेंगी। यह टूर्नामेंट अंडर-14 गर्ल्स चैम्पियनशिप है।

नौवीं में पढ़ रहीं सोनी बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले के नरकटियागंज कस्बे की रहने वाली हैं। साथ ही टीम में बिहार के सीवान के मैरवां की निशा कुमारी को भी जगह मिली है।

सोनी पहले भी नैशनल टीम का हिस्सा रही हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी सोनी एक बेहद ही साधारण परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता पन्नालाल पासवान फिलहाल नेपाल के चितवन में तांगा चलाते हैं।

बीबीसी हिंदी ने टेलीफोन पर सोनी से चैम्पियनशिप की तैयारी, उनके अब तक के सफर, पसंदीदा खिलाड़ियों और सपनों के बारे में बात की। आगे पढ़िए, सोनी की पसंद और व्यिक्तगत जीवन के बारे में।
भारतीय टीम का तैयारी शिविर गांधीनगर में चल रहा था। शिविर में खिलाड़ियों को शाम के बाद ही मोबाइल इस्तेमाल की इजाजत थी।

ऐसे में देर शाम सोनी से मोबाइल पर बात-चीत मुमकिन हुई तो बधाई देने के बाद बीबीसी ने पहला सवाल ये पूछा कि आपने इतने सारे खेलों में फुटबॉल को ही क्यों चुना? जवाब में सोनी ने कहा, "सबकी अपनी 'च्वॉइस' होती है। मैं अपने घर के पास दीदी लोगों को फुटबॉल खेलते देखती थी।"

सोनी आगे बताती हैं, "हमारे इलाके में फुटबॉल खेलने वाली लड़कियां मशहूर थीं। साथ ही मैंने सुना-देखा था कि मेसी का फुटबॉल खेलकर बहुत नाम हुआ है। ऐसे में मुझे लगा कि मैं भी इस खेल के सहारे नाम कमा सकती हूं।"

सोनी ने बताया कि जब उसने फुटबॉल खेलने की ख्वाहिश घरवालों को बताई तो वे बहुत खुश हुए। घरवालों को लगा था कि मेरे फुटबॉल खेलने से घर में भी खुशियां आएंगी।

सोनी कुमारी अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने कोच सुनील वर्मा को देती हैं। सुनील वर्मा अभी नरकटियागंज में टीपी कॉलेज में खेलकूद निदेशक हैं।
कोच सुनील ने ही 2010 के जून में अपने कॉलेज के मैदान में दौड़ लगाती सोनी के हुनर को पहली बार पहचाना था। हुनर पहचानने, उसे निखारने से लेकर इस मुकाम तक पहुंचाने तक, हर पड़ाव में सोनी को उनके कोच का साथ मिला है।
सोनी के कोच बने सहारासोनी बताती हैं, "2013 में मेरा पासपोर्ट नहीं बन पा रहा था। मुझसे कहा गया कि पासपोर्ट नहीं आया तो मुझे घर वापस भेज दिया जाएगा। मैं बहुत रोती थी। ऐसे में मेरे कोच ने सारी परेशानियां उठाते हुए मेरे लिए पासपोर्ट का इंतजाम किया।"

सोनी के मुताबिक बतौर फुटबॉलर इस मुकाम तक इतनी जल्दी पहुंचना उनके लिए सपना सच होने जैसा है। वहीं कप्तान बनना सोनी के लिए अब तक के करियर का सबसे खुशी का मौका है।

हालांकि सोनी बताती हैं कि पिछले साल जब वह अंडर-14 टीम की कप्तान नहीं बन पाई थीं तो उन्हें बहुत बुरा लगा था।

सोनी के सपने छोटे-छोटे हैं। सोनी कहती हैं, "अच्छी फुटबॉलर बनना चाहती हूं। ऐसा कुछ करना चाहती हूं कि मेरी टीम का और नाम हो। मैं अपने देश और घर के लिए भी कुछ करना चाहती हूं।"

सोनी चाहती हैं कि सरकार उनकी टीम की मदद करे, उनकी पढ़ाई में मदद करे और 'थोड़ा खर्चा-वर्चा दे।'
सोनी बड़ी होकर अच्छी सी नौकरी भी करना चाहती हैं जिससे कि उनके घर वाले सुखी रहें। सोनी ने 'बेंड इट लाइक बैकहम' न तो देखी है और न ही इसके बारे में सुना है। सोनी कहती हैं कि आज भी उनके घर में टीवी सेट नहीं है।

सोनी का मन मड़ई (झोपड़ी नुमा घर) में रहते-रहते ऊब गया है। वह चाहती हैं कि उनका घर थोड़ा अच्छा हो जाए। अर्जेंटीना के स्टार स्ट्राइकर लिओनेल मेसी सोनी को सबसे ज्यादा पसंद हैं। साथ ही रोनाल्डो भी सोनी के पसंदीदा खिलाड़ी हैं।

वहीं महिला खिलाड़ियों में भारतीय महिला नैशनल फुटबॉल टीम की बाला देवी सोनी की पसंदीदा खिलाड़ी हैं।

ये पूछने पर कि कभी मेसी से मुलाकात हो गई तो क्या करेंगी, सोनी थोड़ा सोचने लगती हैं। और फिर कुछ पल बाद कहती हैं, "बात-वात करेंगे, पूछेंगे कि तुमने क्या किया कि इस 'लेवल' पर पहुंचे। ऐसे ही कुछ सवाल पूछेंगे।"

टूर्नामेंट की तैयारियों के सिलसिले में सोनी बताती हैं कि बहुत अच्छी तैयारी है। पूरी मेहनत की है कि टीम चैम्पियन बने।

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