Monday, 13 April 2015

शाहकार-ए-मुहब्बत का रंग पड़ा पीला, अफसर बेपरवाह

एक शहंशाह ने दुनिया को मुहब्बत का ऐसा तोहफा दिया जो मिसाल बन गया, लेकिन मुहब्बत के उसी शाहकार ताजमहल से अफसर ऐसे बेमुरव्वत रहे कि चंद सालों में ही यह पीला पड़ गया।

ताजमहल को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश आते रहे, लेकिन जिन अफसरों को इनका पालन कर करना था, वह लगातार लापरवाही बरतते रहे। देश-दुनिया के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के वाहन बेशक ताज तक न जाते हों, लेकिन अफसरों की डीजल कारें ताज तक चलती रहीं।

ताजमहल के पीले पड़ने के लिए रिसर्च में कार्बन कणों और धूल को जिम्मेदार बताया गया है। ताज से सटकर बह रही यमुना साल में 9 महीने सूखी नाले में तब्दील होकर बहती है, जबकि 22 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ताज हेरिटेज कारीडोर की धूल 9 साल से ताज पर जमा हो रही है।
साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने कारीडोर पर हरियाली विकसित करने के निर्देश दिए, लेकिन अफसर 9 साल तक सुप्रीम कोर्ट की अनुमति न होने का बहाना बनाते रहे।

पर्यटन मंत्री ने जवाब मांगा तो अफसरों ने ओएनजीसी की मदद से इस पर एक महीने में काम शुरू करने का वादा भी कर दिया।

लाख टके का सवाल यही है कि आखिर 9 सालों तक ताज पर धूल उड़ती रही और अफसर क्यों गुमराह करते रहे। ऐसे ही कमिश्नर की अध्यक्षता वाली ताज ट्रिपेजियम अथारिटी नियम-कानून का पालन कराने में फेल रही।
सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी का कहना है कि ताजमहल के पास सैकड़ों पेड़ काटे गए। कारीडोर पर सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर काम शुरू नहीं किया गया। यमुना में पानी नहीं। डीजल वाहनों से ताज के अंदर तक जाएंगे तो फिर ताज पीला कैसे न पड़े। धरोहर के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई की जरूरत है।

संसदीय समिति (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय) के चेयरमैन अश्वनी कुमार के मुताबिक, "ताजमहल के संरक्षण में लापरवाही बरती गई है। कमेटी रखरखाव से असंतुष्ट है। सुप्रीम कोर्ट के भी कई आदेशों का पालन नहीं किए जाने की शिकायतें मिली हैं।"

ये बरती लापरवाही
ताजमहल के पास हजारों की संख्या में पेड़ काट दिए गए।
ताजगंज प्रोजेक्ट के नाम पर ताज के प्रवेश द्वार पर काटे पेड़।
1996 से जारी है शहर में कोयले का उपयोग।
पेठा इकाइयां इस साल तक कोयले से भट्टियां जलाती रहीं।
ताज ट्रिपेजियम जोन में नेचुरल गैस की प्रचुर आपूर्ति नहीं।
लकड़ी, कोयला और उपलों का ईंधन घरों में लगातार जारी।
ताज के पास डीजल-पेट्रोल के वाहनों की आवाजाही बरकरार।
कारीडोर की 22 हेक्टेयर जमीन पर रेत के गुबार उड़े।
ताज के पीछे यमुना नदी सूखी, जिससे 9 माह तक धूल जमा।
शहर में कामर्शियल डीजल वाहनों पर रोक नहीं लगाई गई।
यमुना में ट्रीट किए बिना सीवर और नालों का वेस्ट डाला गया।

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