देश में मेट्रोमैन के नाम से प्रसिद्ध ई श्रीधरन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि आर्थिक संकट से गुजर रहे भारतीय रेलवे को हर साल 10 हजार करोड़ रुपए का चूना लग रहा है।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर रेलवे बोर्ड केंद्रीय स्तर पर सामानों की खरीद को रोक दे तो इस नुकसान से बचा जा सकता है।
उन्होंने अपनी फाइनल रिपोर्ट में बताया है कि सरकारी खरीद का केंद्रीकरण होने के कारण रेलवे बोर्ड के कुछ अधिकारियों के पास असीमित पैसा और अधिकार आ जाता है। इससे भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ती है।
श्रीधरन की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट बनाने के दौरान रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी उनकी सलाह ली। रेलवे में खरीद प्रक्रिया का विश्लेषण करने के बाद समिति के आंकलन के अनुसार, जिम्मेदारी तय करने और खरीद अधिकारों के विकेंद्रीकरण से रेलवे के वार्षिक आय में अंतर आएगा।
समिति के अनुसार, खरीद अधिकारों के विकेंद्रीकरण से करीब 5 हजार करोड़ रुपए और कामों के ठेके देने में 5 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी।
समिति ने 15 मार्च को अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें सलाह दी गई थी कि बोर्ड को कोई भी वाणिज्यिक निर्णय नहीं लेना चाहिए। और उसे अपनी जरूरतों के सामना की खरीदारी भी उत्तरी रेलवे से करानी चाहिए।
रिपोर्ट में ये अधिकार जनरल मैनेजर्स और निचले स्तर के अधिकारियों को भी दिए जाने की बात कही गई है।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर रेलवे बोर्ड केंद्रीय स्तर पर सामानों की खरीद को रोक दे तो इस नुकसान से बचा जा सकता है।
उन्होंने अपनी फाइनल रिपोर्ट में बताया है कि सरकारी खरीद का केंद्रीकरण होने के कारण रेलवे बोर्ड के कुछ अधिकारियों के पास असीमित पैसा और अधिकार आ जाता है। इससे भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ती है।
श्रीधरन की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट बनाने के दौरान रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी उनकी सलाह ली। रेलवे में खरीद प्रक्रिया का विश्लेषण करने के बाद समिति के आंकलन के अनुसार, जिम्मेदारी तय करने और खरीद अधिकारों के विकेंद्रीकरण से रेलवे के वार्षिक आय में अंतर आएगा।
समिति के अनुसार, खरीद अधिकारों के विकेंद्रीकरण से करीब 5 हजार करोड़ रुपए और कामों के ठेके देने में 5 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी।
समिति ने 15 मार्च को अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें सलाह दी गई थी कि बोर्ड को कोई भी वाणिज्यिक निर्णय नहीं लेना चाहिए। और उसे अपनी जरूरतों के सामना की खरीदारी भी उत्तरी रेलवे से करानी चाहिए।
रिपोर्ट में ये अधिकार जनरल मैनेजर्स और निचले स्तर के अधिकारियों को भी दिए जाने की बात कही गई है।

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