Monday, 13 April 2015

Net Neutrality: पढ़ें वो जो जानना आपके लिए है सबसे जरूरी

आज की बड़ी बहससोशल मीडिया पर इस वक्त एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। बहस का मुद्दा है नेट न्यूट्रैलिटी। भारती एयरटेल के 'एयरटेल जीरो' मोबाइल इंटरनेट प्लान की घोषणा के बाद से यह बहस और भी तेज हो चुकी है। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी एयरटेल ने एक ऐसे इंटरनेट प्लान की घोषणा की है जिसके तहत चुनिंदा इंटरनेट साइट व कुछ मोबाइल ऐप्स उपभोक्ता फ्री एक्सेस कर सकते हैं।

एयरटेल जीरो स्कीम के तहत जो मोबाइल ऐप एयरटेल को पैसा देगी, उसे कंपनी मुफ्त में इंटरनेट यूजर तक पहुंचाएगी।

उदाहरण के तौर पर ई-टेलर फ्लिपकार्ट (जो‌ कि एयरटेल जीरो स्कीम में शामिल हो चुका है) की एप्लिकेशन एयरटेल यूजर्स फ्री इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को डेटा शुल्क चुकाना नहीं होगा। क्यों‌कि फ्लिपकार्ट ऐसा करने के लिए एयरटेल को पैसा चुकाएगी।

इसका फायदा फ्लिपकार्ट और एयरटेल को तो होगा, लेकिन दूसरी कंपनियों की ऐप जैसे जबॉन्ग और स्नैपडील (जो अभी एयरटेल जीरो स्कीम का हिस्‍सा नहीं हैं) को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। साथ ही उन उपभोक्ताओं के लिए जो फ्लिपकार्ट के बजाय दूसरे ऐप्स का इस्तेमाल करते हों।

इस कदम के एयरटेल के साथ फ्लिपकार्ट भी आलोचनाओं के घेरे में आ गई। इसके चलते फ्लिपकार्ट के सीईओ सचिन बंसल का ट्वीट करना पड़ा। सचिन बंसल लिखते हैं, 'मैं #NetNeutrality के पक्ष में हूं। ऐसी किसी चीज का समर्थन कभी नहीं होगा जो दम घुटने वाली है। प्रतियोगिता बहुत अधिक है, ऐसा में लंबे समय के लिए यह मुमकिन ही नहीं। विकल्प की हमेशा जीत होती है।'
नेट न्यूट्रैलिटी की बात करें यह वो सिद्धांत है जिसके तहत माना जाता है कि इंटरनेट सर्विस प्रदान करने वाली कंपनियां इंटरनेट पर हर तरह के डाटा को एक जैसा दर्जा देंगी।

इंटरनेट सर्विस देने वाली इन कंपनियों में टेलीकॉम ऑपरेटर्स भी शामिल हैं। इन कंपनियों को अलग-अलग डाटा के लिए अलग-अलग कीमतें नहीं लेनी चाहिए। चाहे वो डाटा भिन्न वेबसाइटों पर विजिट करने के लिए हो या फिर अन्य सेवाओं के लिए।

उन्हें किसी सेवा को न तो ब्लॉक करना चाहिए और न ही उसकी स्पीड स्लो करनी चाहिए। ये ठीक वैसा ही है कि सड़क पर हर तरह की ट्रैफिक के साथ एक जैसा बर्ताव किया जाए।

जैसे कारों से उनके मॉडल या ब्रांड के आधार पर पेट्रोल की अलग-अलग कीमतें या अलग रेट पर रोड टैक्स नहीं वसूले जाते हैं।
नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर स्टैंड-अप कॉमेडी ग्रुप AIB ने एक वीडियो जारी किया है। इस ग्रुप ने अपने ढंग से यूजर्स को नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब समझाने की कोशिश है।
इस वीडियो को अब तक 9 लाख से ज्यादा यूजर्स देख चुके हैं। बॉलीवुड किंग ‌खान शाहरुख ने भी इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर किया है।
सवाल उठता है कि टेलीकॉम कंपनियां नेट न्यूट्रैलिटी के खिलाफ क्यों हैं?

वे इस बात से परेशान हैं कि नई तकनीकी ने उनके कारोबार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। उदाहरण के लिए एसएमएस सेवा को व्हॉट्स ऐप जैसे लगभग मुफ्त ऐप ने लगभग मार ही डाला है।

इसलिए वे ऐसी सेवाओं के लिए ज्यादा रेट वसूलने की कोशिश में हैं जो उनके कारोबार और राजस्व को नुकसान पहुंचा रही हैं। हालांकि इंटरनेट सर्फिंग जैसी सेवाएं कम रेट पर ही दी जा रही हैं।

एक सवाल ये भी है कि नेट न्यूट्रैलिटी आपके लिए महत्वपूर्ण क्यों है? इससे मुकरने का एक मतलब ये भी है कि आपके खर्च बढ़ सकते हैं और विकल्प सीमित हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए स्काइप जैसी इंटरनेट कॉलिंग सुविधा की वजह से मोबाइल कॉलों पर असर पड़ सकता है क्योंकि लंबी दूरी की फोन कॉल्स के लिहाज से वे कहीं अधिक सस्ती हैं।

ये टेलीकॉम सर्विस देने वाली कंपनियों के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा था। इस नई हकीकत के मुताबिक खुद को ढालने की बजाय कंपनियों ने स्काइप पर किए जाने वाले फोन कॉल्स के लिए डाटा कीमतें बेतहाशा बढ़ा दीं।


एयरटेल के भारत में 20 करोड़ उपभोक्ता हैं और पिछले साल कंपनी ने स्काइप और वाइबर जैसे ऐप्स पर ज़्यादा चार्ज लगाने की बात कही थी लेकिन इंटरनेट उपभोक्ताओं ने जब इसका विरोध किया तो एयरटेल ने ये फ़ैसला वापस ले लिया था।

भारत में इंटरनेट निष्पक्षता से जुड़ा कोई क़ानून नहीं है और जानकारों का कहना है कि मोबाइल कंपनियां इसका फ़ायदा मुनाफ़ा बनाने के लिए कर रही हैं।

‘नेट न्यूट्रैलिटी’ के हिसाब से जब कोई उपभोक्ता कोई भी डेटा प्लान ख़रीदता है तो उसे हक है कि उस प्लान में दी गई इंटरनेट स्पीड हर ऐप या वेबसाइट के एक समान रहे।

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