फैशन और ग्लैमर के साथ मायानगरी मुंबई में गंदे धंधों का भी बोलबाला है। मुंबई के पास बने एक साइबर कैफे में स्टूडेंट्स को सेक्स केबिन की सुविधा दी जा रही थी, जहां 15 से 20 साल के बच्चे लड़कियों के साथ आकर समय बिताते थे।
मुंबई यूनिवर्सिटी के कॉलेजों के पास वाले इलाके में बने इस साइबर कैफे में पुलिस ने छापा मारा तो दंग रह गई। चांदीबाई हिम्मत लाल मनसुखानी कॉलेज के पास स्थित कैफे में कम उम्र के लड़के लड़किया आपत्तिजनक हालत में थे।
छापामारी के दौरान पुलिस ने वीडियो भी बनाया जिसमें साफ दिखा कि 4*3 के केबिन में लड़के लड़कियां किस तरह बैठे थे और गंदी हरकतें कर रहे थे।
मुंबई यूनिवर्सिटी के कॉलेजों के पास वाले इलाके में बने इस साइबर कैफे में पुलिस ने छापा मारा तो दंग रह गई। चांदीबाई हिम्मत लाल मनसुखानी कॉलेज के पास स्थित कैफे में कम उम्र के लड़के लड़किया आपत्तिजनक हालत में थे।
छापामारी के दौरान पुलिस ने वीडियो भी बनाया जिसमें साफ दिखा कि 4*3 के केबिन में लड़के लड़कियां किस तरह बैठे थे और गंदी हरकतें कर रहे थे।
वीडियो में दिखे जोड़ों के चेहरे, केबिन में थे अंतरंग
डेली मेल के अनुसार, छापामारी के दौरान साइबर कैफे में मिले सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 294 (अश्लील हरकतें करना) के आरोप में गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग में कई जोडों के चेहरे भी सामने आए हैं।
एंटी टेरोरिज्म सेल के प्रमुख इंस्पेक्टर सतपाल निर्मल ने बताया कि छापामारी के दौरान वहां से 11 जोड़ों के अलावा साइबर कैफे का मालिक लल्लन शाह और मैनेजर निरंजन को भी गिरफ्तार किया गया।
सतपाल ने कहा कि लल्लन साइबर कैफे में सेक्स रैकेट चला रहा था, क्योंकि उसके पास सिर्फ 3 कंप्यूटर थे और 20 केबिन बना रखे थे। कार्रवाई में शामिल एक पुलिसकर्मी ने बताया कि उल्हासनगर इलाके में रहने वाले लोगों ने हाल ही में पुलिस स्टेशन में शिकायत दी थी कि साइबर कैफे में सेक्स रैकेट चल रहा है।
साइबर कैफे में बेचते थे कंडोम और गर्भनिरोधक दवाएं
सूत्रों के अनुसार, जब स्थानीय पुलिस ने शिकायत पर कोई एक्शन नहीं लिया तो उन्होंने ठाणे के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर वीवी लक्ष्मीनारायण से संपर्क साधा, जिन्होंने एटीसी को साइबर कैफे में छापा मारने का निर्देश दिया।
जब स्थानीय पुलिस से इस संबंध में सवाल किया गया तो उल्हासनगर के डीसीपी वसंत जाधव कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। सूत्रों ने बताया कि साइबर कैफे अवैध रूप से चल रहा था क्योंकि उसके मालिक के पास किसी तरह का लाइसेंस नहीं मिला।
साइबर कैफे यहां करीब 7 साल से चल रहा था। मालिक ने वेश्यावृत्ति के लिए बगल के कमरों में बेड भी रखे थे। वह कंडोम और गर्भनिरोधक दवाएं भी बेचते थे। मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने कहा कि वह अभी इस संबंध में कुछ नहीं बता सकते कि पकड़े गए लड़कों में से कोई कॉलेज का भी है या नहीं।
जब स्थानीय पुलिस से इस संबंध में सवाल किया गया तो उल्हासनगर के डीसीपी वसंत जाधव कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। सूत्रों ने बताया कि साइबर कैफे अवैध रूप से चल रहा था क्योंकि उसके मालिक के पास किसी तरह का लाइसेंस नहीं मिला।
साइबर कैफे यहां करीब 7 साल से चल रहा था। मालिक ने वेश्यावृत्ति के लिए बगल के कमरों में बेड भी रखे थे। वह कंडोम और गर्भनिरोधक दवाएं भी बेचते थे। मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने कहा कि वह अभी इस संबंध में कुछ नहीं बता सकते कि पकड़े गए लड़कों में से कोई कॉलेज का भी है या नहीं।


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