Monday, 20 April 2015

किसान विरोधी छवि से डर गये मोदी ?

राहुल के आरोपों का जवाब तो नहीं दिया मोदी नेएक हाथ मुकेश अंबानी के हाथों में, दूसरा नीता अंबानी के। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह तस्वीर पिछले साल चर्चा का विषय बन गई थी। तस्वीर में मुकेश अंबानी का हाथ प्रधानमंत्री के कंधे पर था। उस तस्वीर से यही लगा कि प्रधानमंत्री के कंधे पर मुकेश अंबानी का हाथ है। तस्वीर से कई और चीजें भी लगीं। अनेकों व्याख्याएं की गईं। 

अधिकांश व्याख्याओं का लब्बोलुआब यही था कि नरेंद्र मोदी की उद्योगपतियों से कुछ ज्यादा ही नजदीकी हैं। कांग्रेस ने भी मोदी की उस छवि को भुनाने की खूब कोशिश की। हालांकि रविवार को प्रधानमंत्री ने कहा कि वे मुकेश अंबानी के लिए जमीन नहीं मांग रहे हैं, तो एकाएक उस छवि को तोड़ने की कोशिश करते दिखे। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के सांसदों से कहा कि उनकी सारी नीतियां गरीबों और कमजोरों के लिए है। उन्होंने अपनी पार्टी के सांसदों को आदेश दिया कि भूमि अधिग्रहण बिल पर वे आंख से आंख मिलाकर बात करें और बताएं कि उनकी सरकार की सारी पूरी तरह गरीबों के लिए समर्पित है। 

रोचक बात ये रही कि जिस समय मोदी ये नसीहत अपने सांसदों को दे रहे ‌थे, उसी समय कांग्रेस रामलीला मैदान में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ रैली कर रही थी। तो मोदी के बयानों का मतलब क्या निकाला जाए? क्या वे कांग्रेस से डर गए थे, या उन्‍हें ये डर है कि कांग्रेस उनकी छवि किसान विरोधी न बना दे।
मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल ने मानों कांग्रेस को संजीवनी दे दी है। कांग्रेस ने उस बिल के भरोसे ही 59 दिनों की छुट्टियां बिताकर लौटे राहुल गांधी की रि-लॉन्चिंग भी कर दी। 

जानकारों को मानना है कि लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों में लगातार हार के बाद कांग्रेस अपनी जमीन खोती जा रही थी, लेकिन मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण बिल लाकर कांग्रेस जमीन वापस पाने को मौका दिया। रामलीला मैदान में कांग्रेस ने अपने दमखम का प्रदर्शन भी किया। 

जबकि भूमि अधिग्रहण बिल पर मोदी सरकार पहले दिन से बैकफुट पर दिखी। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने जब बिल को किसान विरोधी बताया, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी को मैदान में उतारना पड़ा। 

नीतिन गडकरी ने बिल को लेकर केंद्र सरकार पर लग रहे आरोपों का जवाब देने का प्रयास भी किया।
भाजपा प्रवक्ताओं ने बिल के समर्थन में हमेशा ही ये कहा कि बिल विकास का समर्थक न कि किसानों का विरोधी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को विकास जैसे जुमलों से बचते हुए, अधिक स्पष्ट होकर उन्होंने कहा कि वे जमीन मुकेश अंबानी के लिए नहीं मांग रहे। 

मोदी का ये बयान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान का जवाब लगा, जिसमें हमेशा वो कहते रहते हैं कि मोदी सरकार अडानी की हितैषी है। उन्हीं लोगों के लिए वह जमीन का अधिग्रहण कर रही है। 

कांग्रेस प्रवक्ताओं ने भी अक्सर ये आरोप लगाया कि मोदी अंबानी और अडानी जैसे लोगों के लिए किसानों की भूमि हड़पना चाहते हैं। ऐसे में क्या माना जाए कांग्रेस के अरोपों से मोदी डर गए। 

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