बदलते दौर में जहां लोग बुढ़ापे में अपने माता-पिता का साथ छोड़ देते हैं, और उनकी मृत्यु के बाद तमाम कर्मकांड-संस्कार तक करने से कतराते हैं। लेकिन कानपुर में एक परिवार ने अपने चहेते डॉगी की मौत के बाद बकायदा शांति यज्ञ कर उसकी तेरहवीं की और उसके साथियों को महाभोज करा कर शहर में मिसाल कायम की है। देखे डॉगी की तेरहवीं के इस महाभोज के रंग।
यह डॉगी कब परिवार का इताना अहम हिस्स बना गया खुद परिवार को भी नहीं पता चला।
कानपुर के हरजेन्दर नगर निवासी सुनीता सिंह की छोटी बेटी पंद्रह साल पहले रांची से इस डॉगी को लाई।
पंद्रह साल तक परिवार का अहम सदस्य रहने के बाद बीते 26 मार्च को इस डॉगी की मृत्यु हो गई और परिवार शोक में डूब गया।
यह डॉगी कब परिवार का इताना अहम हिस्स बना गया खुद परिवार को भी नहीं पता चला।
कानपुर के हरजेन्दर नगर निवासी सुनीता सिंह की छोटी बेटी पंद्रह साल पहले रांची से इस डॉगी को लाई।
पंद्रह साल तक परिवार का अहम सदस्य रहने के बाद बीते 26 मार्च को इस डॉगी की मृत्यु हो गई और परिवार शोक में डूब गया।

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