एक सरकारी सूत्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि केन्द्र सरकार के पास इस संदर्भ में कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है। बताते हैं कि कानून मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से यह भी कहा है कि ऎसा कोई भी कदम उठाया जाना न केवल कानूनी रूप से अधिकार क्षेत्र में न आने योग्य है बल्कि यह संविधान के मूल सिद्धान्तों के खिलाफ भी है।
गृह मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से इस संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। उल्लेखनीय है कि कुछ हिन्दू संगठनों ने जिन्हें केन्द्र के कुछ मंत्रियों का भी समर्थन हासिल है, ने सरकार से धर्मान्तरण विरोधी कानून बनाए जाने की मांग की थी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी धर्मान्तरण को लेकर सवाल उठाए थे और धर्मान्तरण विरोधी कानून पर बहस की जरूरत की वकालत की थी।
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