Wednesday, 8 April 2015

देश की दूसरी ‘मैरीकॉम’ घरों में लगाती है झाड़ू-पोछा

कैथल. इन्हे आप देश की दूसरी 'मैरीकॉम' कह सकते है, अगर इस खिलाड़ी को पूरी डाइट मिल जाए तो, जी हाँ वैसे तो  भारत में खेलों का बहुत महत्व है खास कर जब कोई लड़की किसी खेल में भाग लेती है तो उसे बहुत सराहा जाता है और खेल अगर मुक्केबाजी का हो तो उसकी  प्रशंसा करते कोई थकता नही है. बात खेलों की करी जाये तो एक तरफ हमारे देश के क्रिकेटर करोड़ों कमाते हैं और अन्य खेलों में भी भारत आगे बढ़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ एक और सच्चाई हमें शर्मसार करती है. 16 साल की हरियाणा स्टेट मुक्केबाज चैंपियन रिशु मित्तल घरों में झाड़ू-पोंछा लगाकर अपना खर्चा चलाती हैं. रिशू हरियाणा के कैथल से हैं. उन्होंने पिछले साल राज्य मुक्केबाजी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था.
रिशु ने बताया की वे रोज़ बड़े जोश और लगन के साथ सुबह शाम मुक्केबाजी का अभ्यास करती हैं. कोच की मदद और कठिन परिश्रम से उसने स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. रिशु मित्तल बेहद गरीब परिवार से है. उसके पास दूध, दही, पनीर और फल खाना तो दूर एक वक्‍त की रोटी खाने के लिए भी पैसे नहीं होते. जानकारों का मानना है कि अगर इस खिलाड़ी को यदि पूरी डाइट मिल जाए तो देश की दूसरी ‘मैरीकॉम’बन सकती है. 46 किग्रा भार वर्ग में जीता खिताब. रिशु ने सितंबर 2014 में राज्य स्तर पर 46 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता. दिसबंर 2014 में उसने ग्वालियर में हुए राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया. इससे पूर्व 2013 में फरीदाबाद और 2012 में भिवानी में हुए राज्य स्तरीय खेलों में बॉक्सिंग में ही कांस्य पदक भी प्राप्त किया.

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