सरेशवाला शुक्रवार को जामिया उर्दू अलीगढ़ की स्थापना दिवस पर ‘मुसलमानों की समस्याएं और हमारी जिम्मेदारियां’ विषय पर बोल रहे थे। इस मौके पर जामिया उर्दू द्वारा जफर सरेशवाला को दख्तूर-ए-अदब अवार्ड से सम्मानित किया गया। अपने संबोधन के क्रम में सरेशवाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान किया।
उन्होंने कहा कि आज मुसलमान नाक की दंडी पर गुस्सा रखता है। हम इस मुल्क में आए हैं और रहते हैं। हमने हिंदुओं को क्या दिया? 1200 साल से रह रहे हैं लेकिन आज तक हिंदू भाई हमारे नाम का सही उच्चारण नहीं कर पाते।
कभी हमने उन्हें ‘अल्लाह हु अकबर’ या ‘अजान’ के बारे में बताया। आज जरूरत इस बात की है कि हम अपनी जिंदगी में इस्लाम को लाएं। आज हम दो ही जगह यानी बीबी को तलाक देने वक्त या बाप के मरने पर बहन का धन हड़पने वक्त इस्लाम को याद करते है।
उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत समस्या हमारे भीतर है, जिसे दूर कर लें तो समस्याएं दूर हो जाएंगी। यूपी व बिहार वालों से कहना चाहता हूं कि मुसलमानों की समस्याओं को लेकर सीधे नरेंद्र मोदी से बात करें। राजनीति के दलालों से बचें। मैं नरेंद्र मोदी को 12 साल से करीब से देख रहा हूं।
मोदी मानते हैं कि मुसलमान पिछड़ा है। मुल्क तब तक तरक्की नहीं कर सकता जब तक मुसलमान तरक्की नहीं करते। वह यह भी स्वीकारते हैं कि मुसलमानों को अपना करतब दिखाने का अवसर नहीं मिला है, और उनके साथ भेदभाव हुआ है।
हम मोदी से सिर्फ दो चीज मांगते है। हमें सिर्फ अवसर दो और हमारे साथ भेदभाव न करो। बाद में सरेशवाला ने पत्रकारों से कहा कि जब मुलायम सिंह यादव, लालू यादव, ममता बनर्जी आदि मोदी से मिल सकते हैं तो आजम खां एवं जफर सरेशवाला क्यों नहीं?
उनका कहना था कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में दो तरह के लोग हैं। एक उलेमा और दूसरे राजनीति के ठेकेदार। राजनीति के ठेकेदार नहीं चाहते कि मुस्लिमों का संबंध नरेंद्र मोदी से बेहतर बने। ये लोग देश के मुसलमानों की सुरक्षा को राजनीतिक मुद्दा बनाकर फायरिंग रेंज में डाल दिया है।
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