उन्होंने मोदी की महत्वाकांक्षी योजना मेक इन इंडिया का जिक्र करते हुए कहा कि मेड इन चाइना और मेक इन इंडिया साथ-साथ काम कर सकते हैं। हम इस नए मोमेंटम से खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि भारत भविष्य में प्रगति करेगा और तेजी से विकास करेगा।
हुआंग ने कहा, सीमा विवाद को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। दोनों नेताओं के राजनीतिक इच्छा शक्ति जितनी मजबूत होगी, सीमा विवाद के समाधान की संभावनाएं उतनी ही अच्छी होंगी। हाल में नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में प्रगति हुई है। हमें विश्वास है कि दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुसार दोनों प्रतिनिधि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते रहेंगे।
गौरतलब है कि चीन और भारत के बीच अलग-अलग जगहों पर सीमा विवाद है। हालांकि चीन महज 2000 किमी क्षेत्र में ही सीमा विवाद मानता है लेकिन भारत की नजर में साल 1962 में चीन से जुड़े अक्साई चीन का एरिया मिलाकर इसका दायरा 4000 किमी का है।
अगले महीने के तीसरे सप्ताह में होने वाले मोदी के चीन दौरे को लेकर भारतीय मीडिया से बातचीत में हुआंग ने माना कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के समाधान की अच्छी संभावनाएं बन रही हैं। चीन ने कहा कि सीमा विवाद के समाधान की अच्छी संभावनाएं हैं बशर्ते दोनों देश दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखाएं। पेइचिंग की तमन्ना है कि भारत और चीन नेपाल और श्रीलंका के विकास के लिए पुल की तरह काम करें ताकि एशिया के दो बड़े देशों के बीच रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता को कम हो।
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