Sunday, 5 April 2015

जमीन पर नहीं दिख रहा सांसद आदर्श ग्राम

आजमनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 15 अगस्त 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना की घोषणा की थी, तब लोगों को लगा था कि कटिहार के एक गांव का कायाकल्प होगा, जो आदर्श गांव कहलायेगा. लेकिन आम लोगों का यह ख्वाब अब तक हकीकत में नहीं बदला है. ऐसा भी नहीं है कि आदर्श ग्राम के लिए पहल नहीं हुई.

जब प्रधानमंत्री मोदी इस योजना की शुरू की तो कटिहार के सांसद तारिक अनवर ने भी जिले के एक गांव को आदर्श बनाने के लिए गोद लिया. सांसद श्री अनवर ने प्रखंड के निमौल को सांसद आदर्श ग्राम योजना के लिए चयन किया तथा जिला प्रशासन को अपना प्रस्ताव भेज दिया.

योजना के मार्गदर्शिका के अनुरूप जिला प्रशासन ने ‘निमौल’ को आदर्श ग्राम बनाने के लिए कवायद शुरू की. जिला प्रशासन के आला अधिकारी निमौल पहुंच कर सांसद श्री अनवर की मौजूदगी में सांसद आदर्श ग्राम योजना की अवधारणा से आमलोगों को अवगत कराया तथा निमौल के समग्र विकास के लिए एक रोड मैप बनाया. विकास के तमाम तरह के खाका खींचने व घोषणाएं अब तक जमीन पर नहीं उतरी है.
 
सुविधाओं का अभाव
आदर्श ग्राम बनाने के लिए चयनित गांव में अब तक विकास की रोशनी नहीं पहुंची है. सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधा से लोग महरूम है. जब आदर्श ग्राम के लिए प्रशासनिक महकमा व सांसद पहल कदमी हुई थी तो लोगों में यह आस जगी थी कि अब निमौल के लोगों की तकदीर बदलने वाली है. यह गांव समृद्ध व खुशहाल बनेगा. लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ. जबकि गांव को समृद्ध व आदर्श बनाने के लिए शिविर लगाया गया था.
 
गांव में पक्की सड़क नहीं
निमौल पंचायत की आबादी करीब 14 हजार के आसपास है. करीब 80 फीसदी आबादी अल्पसंख्यकों की है. जबकि शेष फीसदी अतिपिछड़ा, आदिवासी, दलित-महादलित समुदाय की है. 8 राजस्व गांव वाले इस पंचायत में मात्र 8 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिसमें 5 भवनहीन है. स्वास्थ्य केंद्र हमेशा बंद ही रहता है. पंचायत में एक भी पक्की सड़क नहीं है. मनरेगा व पंचायत भवन है. जबकि बिजली की सुविधा से लोग वंचित हैं. शिक्षा में गुणवत्ता का सर्वथा अभाव है.

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