काले धन पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के सर्वोच्च अदालत में नई स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल किए जाने की संभावना है।
इस रिपोर्ट में कर चोरी और भारतीय नागरिकों द्वारा विदेशों में जमा गैरकानूनी धन से संबंधित मामलों में विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई का जिक्र होगा।
सूत्रों का कहना है कि उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने कुछ वक्त पहले अपनी रिपोर्ट के लिए तथ्य और आंकड़े जुटाने शुरू किए थे और अंतिम आंकड़ों में एचएसबीसी बैंक से जुड़े 628 मामलों में आयकर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को भी शामिल किए जाने की उम्मीद है। इसकी समय सीमा 31 मार्च को खत्म हो चुकी है।
इस घटनाक्रम से जुडे़ सूत्रों का कहना है कि एसआईटी इस महीने के पहले पखवाड़े के अंदर सर्वोच्च अदालत में अपनी नई स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। साथ ही यह रिपोर्ट सरकार को भी सौंपी जाएगी। विभिन्न एजेंसियों द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-15 में जुटाए गए राजस्व संबंधी आंकड़े भी रिपोर्ट में होंगे।
सूत्रों का कहना है कि सर्वोच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश एमबी शाह की अध्यक्षता वाली समिति ने हाल ही में एसआईटी के तहत आने वाली सभी एजेंसियों के साथ कम से कम दो बड़ी बैठकें की ताकि रिपोर्ट में काले धन से संबंधित जांच के सभी पहलुओं को शामिल किया जा सके।
शाह की अध्यक्षता वाली समिति सरकार को पहले भी दो रिपोर्ट सौंप चुकी है। इन रिपोर्टों में कई सिफारिशें की गई हैं जिसमें देश में कर चोरी को अपराध घोषित करने, प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और एक सीमा से अधिक का लेनदेन के लिए पैन नंबर अनिवार्य बनाना शामिल है।
भारत समेत कुछ अन्य देशों के स्विस बैंकों में जमा काले धन के मामलों में आपराधिक कार्यवाही की धमकी दिए जाने के बीच यूरोपीय देशों ने अपने बैंकिंग प्रणाली से गैरकानूनी धन को दूर रखने के प्रयासों और इस पर निगरानी बढ़ा दी है।
स्विस फाइनेंशियल मार्केट सुपरवाइजरी अथॉरिटी (एफआईएनएमए) के अनुसार, यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब कई स्विस बैंकों से जमा धन को निकालने में तेजी आई है। साथ ही बैंकों ने अपने कई उपभोक्ताओं की टैक्स स्टेट्स अनुचित पाया है।
एफआईएनएमए मनी लॉड्रिंग की गतिविधियों के खिलाफ काम करता है। स्विट्जरलैंड सरकार भारत और कुछ अन्य देशों के साथ कर मामलों में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
एफआईएनएमए के अनुसार, अमेरिका की तरह जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम और अर्जेंटीना हाई प्रोफाइल आपराधिक जांच करा रहे हैं जबकि इस्राइल और भारत ने ऐसा करने की धमकी दी हुई है।
इस रिपोर्ट में कर चोरी और भारतीय नागरिकों द्वारा विदेशों में जमा गैरकानूनी धन से संबंधित मामलों में विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई का जिक्र होगा।
सूत्रों का कहना है कि उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने कुछ वक्त पहले अपनी रिपोर्ट के लिए तथ्य और आंकड़े जुटाने शुरू किए थे और अंतिम आंकड़ों में एचएसबीसी बैंक से जुड़े 628 मामलों में आयकर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को भी शामिल किए जाने की उम्मीद है। इसकी समय सीमा 31 मार्च को खत्म हो चुकी है।
इस घटनाक्रम से जुडे़ सूत्रों का कहना है कि एसआईटी इस महीने के पहले पखवाड़े के अंदर सर्वोच्च अदालत में अपनी नई स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। साथ ही यह रिपोर्ट सरकार को भी सौंपी जाएगी। विभिन्न एजेंसियों द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-15 में जुटाए गए राजस्व संबंधी आंकड़े भी रिपोर्ट में होंगे।
सूत्रों का कहना है कि सर्वोच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश एमबी शाह की अध्यक्षता वाली समिति ने हाल ही में एसआईटी के तहत आने वाली सभी एजेंसियों के साथ कम से कम दो बड़ी बैठकें की ताकि रिपोर्ट में काले धन से संबंधित जांच के सभी पहलुओं को शामिल किया जा सके।
शाह की अध्यक्षता वाली समिति सरकार को पहले भी दो रिपोर्ट सौंप चुकी है। इन रिपोर्टों में कई सिफारिशें की गई हैं जिसमें देश में कर चोरी को अपराध घोषित करने, प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और एक सीमा से अधिक का लेनदेन के लिए पैन नंबर अनिवार्य बनाना शामिल है।
भारत समेत कुछ अन्य देशों के स्विस बैंकों में जमा काले धन के मामलों में आपराधिक कार्यवाही की धमकी दिए जाने के बीच यूरोपीय देशों ने अपने बैंकिंग प्रणाली से गैरकानूनी धन को दूर रखने के प्रयासों और इस पर निगरानी बढ़ा दी है।
स्विस फाइनेंशियल मार्केट सुपरवाइजरी अथॉरिटी (एफआईएनएमए) के अनुसार, यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब कई स्विस बैंकों से जमा धन को निकालने में तेजी आई है। साथ ही बैंकों ने अपने कई उपभोक्ताओं की टैक्स स्टेट्स अनुचित पाया है।
एफआईएनएमए मनी लॉड्रिंग की गतिविधियों के खिलाफ काम करता है। स्विट्जरलैंड सरकार भारत और कुछ अन्य देशों के साथ कर मामलों में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
एफआईएनएमए के अनुसार, अमेरिका की तरह जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम और अर्जेंटीना हाई प्रोफाइल आपराधिक जांच करा रहे हैं जबकि इस्राइल और भारत ने ऐसा करने की धमकी दी हुई है।

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