Thursday, 2 April 2015

नरेंद्र मोदी की IT योजना पर बंदरों का धावा

वाराणसी
भारत में इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी के लिए 18 बिलियन डॉलर की भारी भरमक राशि खर्च की जा रही है। फिर भी इस प्लान के विस्तार की राह में कुछ रोड़े हैं जिनको हटाना काफी मुश्किल साबित हो रहा है। आईटी एक्सपैंशन के रास्ते में बिजली की कटौती, गलत तरीके से प्लान किए गए, ट्रैफिक जाम से जूझते शहर और बंदरों की बाधा को पार करना एक अहम चुनौती है।

ऐसे में बात अगर नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की करें तो श्रद्धालुओं के लिए यह मोक्ष दिलाने वाला पवित्र शहर है। वहीं यह सैकड़ों बंदरों का भी शहर है जो मंदिरों में रहते हैं और जिन्हें श्रद्धालु दावत खिलाते हैं। लेकिन ये बंदर फाइबर-ऑप्टिक के केबल को भी अपनी दावत बना लेते हैं।

कम्यूनिकेशन इंजिनियर ए.पी.श्रीवास्तव ने कहा, 'हम मंदिरों को यहां से हटा नहीं सकते। हम यहां कुछ भी बदलाव नहीं कर सकते। बंदर सारे तारों को तहस-नहस कर देते हैं और खा जाते हैं। तार लगाने के दो महीनों के भीतर ही बंदरों की फौज ने उन्हें नष्ट कर दिया।'

मोदी की आईटी योजना पर बंदरों का धावा
श्रीवास्तव स्थानीय जिलों में नए कनेक्शंस का जिम्मा संभालते हैं। उन्होंने कहा कि हमने इसका विकल्प ढूंढने की कोशिश की लेकिन हमें कोई दूसरी तरकीब सूझी नहीं। अगर हम बंदरों को भगाते हैं तो यहां के लोग भड़क जाएंगे। वहीं, बिजली की कटौती भी आईटी एक्सपैंशन की योजना में रोड़ा डाल रही है। गर्मियों में वाराणसी समेत भारत के कई शहरों में घंटो बिजली गुल रहती है। ऐसे में वाई-फाई लगाना दूर का सपना लगता है।

मोदी सरकार ने भारत के 250,000 गावों को ब्रॉडबैंड कनेक्शन दिलाने का वादा किया था। इसके साथ ही मोदी ने 100 स्मार्ट सिटीज बनाने की भी बात कही थी। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए यह रास्ता मुश्किल जान पड़ता है।

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