नई दिल्ली। भारत के सरकारी और अहम कारोबारी ठिकानों की चीन से साइबर जासूसी हो रही है। इसमें देश के सैन्य विभागों से गोपीनीय जानकारियों की सेंधमारी की कोशिशें भी शामिल हैं। इंटरनेट सिक्योरिटी कंपनी फायरआई इंक ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि इंटरनेट पर कुछ हैकर्स पिछले एक दशक से दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के सरकारी व अहम कारोबारी ठिकानों की खुफिया जानकारियां एकत्रित कर रहे हैं। फायरआई इंक ने आशंका जताई है कि यह हैकर्स चीन से साइबर हमले कर रहे हैं।
फायरआई की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2005 से साइबर जासूसी की गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। इस दौरान साइबर हमलों के निशाने पर भारत समेत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य जानकारियां हैं। रिपोर्ट का दावा है कि पिछले एक दशक से जिस तरह इस क्षेत्र ने कई बैकर्स काम कर रहे हैं, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं ऐसी गतिविधियों को चीन की सरकार से मदद मिल रही है।
कई साल से हो रहे साइबर हमले
इंटरनेट सिक्योरिटी कंपनी फायरआई इंक के एशिया पैसिफिक प्रमुख और रिपोर्ट के लेखक ब्राइस बोलैंड का कहना है कि इस तरह के साइबर हमले पिछले कई साल से लगातार हो रहे हैं और मौजूदा वक्त में भी जारी हैं। बोलैंड ने कहा कि इस क्षेत्र में उसके कई ग्राहकों के सरवर पर लगातार हमले हो रहे हैं।
चीन नकारता रहा है साइबर हमले के आरोप
इससे पहले भी चीन सरकार पर साइबर हमले कराने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन वह इसे नकारता रहा है। इस रिपोर्ट पर भी अभी तक न तो चीन के विदेश मंत्रालय और न ही चीन के साइबर मामलों के विभाग से मांगी गई लिखित जानकारी का कोई जवाब दिया गया है। इससे पहले साल 2011 में इंटरनेट सुरक्षा कंपनी मैकेफे ने अपनी रिपोर्ट के जरिए दावा किया था कि चीन से ‘शेडी रैट’ नाम से प्रचलित साइबर हमलों को अंजाम दिया जा रहा है। इन हमलों में भी एशियाई देशों की सरकार और अन्य संस्थाओं की खुफिया सूचनाएं चुराने का मामला था।
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