Saturday, 11 April 2015

बाप से पत्‍नी के संबंध का था शक, खत्म कर लिया पूरा परिवार

बागपत  :जितनी खौफनाक वारदात, उतना ही हौलनाक खुलासा। पुलिस का दावा है कि किरठल में बुधवार रात आलमगीर ने ही अपनी पत्नी सलीमा और तीन बच्चों का खून किया था। उसे अपनी पत्नी और अपने पिता दलशेर के रिश्तों पर शक हो गया था। उसे लगता था कि उसके बच्चे उसके नहीं है।

इसी शक में वह शैतान बन गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। उसकी निशानदेही पर एक हथौड़ा और एक दरांती मिली है। एसपी शरद सचान ने शुक्रवार दोपहर अपने दफ्तर में मीडिया को इस खुलासे की जानकारी दी। उन्होंने बताया आलमगीर की कई बातें झूठी निकली।

इसके चलते उस पर शक हो गया। उससे पूछताछ हुई तो उसने जुर्म कुबूल लिया। उसने बताया उसे अपनी पत्नी पर शक था। उसे लगता था कि उसकी पत्नी के उसके पिता के साथ रिश्ते हो गए हैं।

उसके मन में ऐसे ख्याल आने लगे कि बच्चे उसके नहीं है। इसलिए उसने बीवी और बच्चों को मारने की ठीन ली। प्रेस कांफ्रेंस में उसने मीडिया को बताया वह बुधवार रात कोल्ड ड्रिंक लेकर घर आया था। उसने शाहपुर में बस के कंडक्टर से यह कहकर सल्फास मंगाई थी उसे गेहूं में रखनी है। इसे धोखे से कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर सलीमा को दे दिया था।

उसे उल्टी हुई। फिर बिस्तर में ही शौच हो गया। मैंने उसके कपड़े बदल दिए। इसके बाद जब सलीमा और तीनों बच्चे सो गए तो रात के एक बजे वह उठा। पहले सलीमा को मारा। फिर उसके पास सो रहे बेटे सूफियान और बेटी आसमीन के सिर पर एक एक कर हथौड़ा मारा। दोनों बेहोश हो गए।

फिर एक कर दोनों के गले काटे। इसके बाद दूसरे कमरे में सो रही बेटी करीना को भी इसी तरह मार दिया। रात को चार बजे वहां से भाग निकला। हथौड़ा और दरांती गांव में ही खेत में गाढ़ दिए और शाहपुर भाग गया। वहां से सुबह घर से फोन आने के बाद वापस आया।
पांच साल से खून के घूंट पी रहा था। मेरी बीवी मेरी नहीं रही। मेरे बच्चे नाम के लिए मेरे थे, लेकिन मुझे लगता था कि हकीकत में मेरे नहीं है। मेरे सामने सलीमा मेरे अब्बू दलशेर से हंसकर बात करती थी। मैं उनका रिश्ता समझ गया था।

उसे समझाया, लेकिन नहीं मानी, उल्टा मुझसे लड़ती थी, कहती थी, तुम कभी ठीक हो पाओगे, या बीमार ही रहोंगे। फिर मैंने भी सोच लिया, न इसे छोड़ूंगा, न इसके पेट से पैदा हुए बच्चों को। मैंने जब कत्ल किए, तो अफसोस नहीं हुआ। मुझे लग रहा था, जैसे मैं अपना बदला ले रहा हूं...

चौहरे हत्याकांड में गिरफ्तार हुए आलमगीर ने कुछ इसी तरह पुलिस के सामने अपनी क्रूरता की कहानी बयां की। उसने पहले साजिश के बारे में बताया। बोला, जिस बस पर मैं ड्राइवर हूं, उसके कंडक्टर से मंगलवार को ही सल्फास की गोलियां मंगा ली थी। उससे कहा था कि गेहूं में रखनी हैं।

बुधवार को रात नौ बजे मैं रमाला से एक कोल्ड ड्रिंक लेकर घर पहुंचा। बच्चे सो चुके थे। पास में रहने वाली मेरी बहन वाजिदा और अब्बू दलशेर भी गहरी नींद में थे।

मैंने सलीमा से कहा, तू मुझसे नाराज क्यों रहती है? वो इत्ती सी बात पर गुस्से में आ गई। झल्लाकर बोली, फालतू बात न कर, चुपचाप सो जा। मैंने कोल्ड ड्रिंक में पहले से जहर मिलाकर रखा था।

मैंने कहा चल मेरे कहने से कोल्ड ड्रिंक तो पी ले। वो राजी हो गई और एक घूंट पीते ही उसकी हालत बिगड़ने लगी। उसे उल्टी हुई और चक्कर आने लगा। फिर चारपाई पर लेट गई। उसे शौच आ गया। मैंने उसके कपड़े बदले। फिर आधी रात तक इंतजार किया।
एक बजे मैं उठा। हथौड़ा उठाया। दरांती ली। बड़ी जोर से हथौड़ा सलीमा के सिर में मारा। वो पहले ही मर चुकी थी। फिर भी मैंने सोचा कहीं कोई सांस बची न हो, इसलिए दरांती से गहराई तक उसका गला काट दिया। मुझे बड़ा चैन मिला। फिर थोड़ी देर उसका खून निकलते हुए देखता रहा। दूसरे नंबर पर बेटे सूफियान का हथौड़े से सिर फोड़ा। वो एक वार में ही बेहोश हो गया।

इसके बाद उसका गला काटा। इसी तरह बेटी आसमीन को मारा। कोई उफ तक नहीं बोला। जब उनके जिस्म के खूब सारा खून निकल गया, तो मुझे यकीन हो गया कि अब नहीं बचेंगे। इसके बाद बेटी करीना को मारने चला। वो पास के कमरे में तख्त पर लेटी थी, लेकिन वह जाग गई। मुझे लगा कि उसने कुछ देख तो नहीं लिया, लेकिन वह टायलेट करने को उठी थी। फिर वहीं आकर लेट गई।

थोड़ी देर इंतजार किया। फिर उसे भी सिर में हथौड़ा मारकर और गला काटकर मार डाला। इसके बाद उसके खून का एक एक कतरा जिस्म से निकल जाने का इंतजार किया। फिर सुबह चार बजे घर से निकला।

खून का एक भी कतरा बचने न पाए...
पुलिस मान रही थी कि आलमगीर ने चारों खून दो चार मिनट में फटाफट कर दिए होंगे। जुनून में इंसान ऐसे ही शैतान बनता है, लेकिन नहीं। ऐसा नहीं है। आलमगीर ने बताया उसने चारों को बड़े इत्मिनान से मारा। एक का गला काटने के बाद दूसरे का नंबर जब तक नहीं लिया जब तक कि उसके जिस्म से खून का एक एक कतरा बाहर नहीं आ गया। इसमें उसे 1.5 से दो घंटे लग गए।
आलमगीर ने बताया उसे लगता था कि उसकी सबसे बड़ी बेटी साहिबा उसकी ही है। इसलिए कभी उसे मारने का ख्याल उसके मन में नहीं आया। अगर उस पर शक होता, तो उसे भी नहीं छोड़ता था। अगर अब्बू भी सलीमा और बच्चों के पास सो रहे होते, तो उन्हें भी नहीं छोड़ता। वो इसलिए बच गए क्योंकि दूर थे। जितना गुस्सा सलीमा पर था, उतना ही अब्बू पर था।

कातिल बोला, मुझे सरेआम फांसी दो
आलमगीर ने अपना गुनाह पुलिस के सामने कुबूल करने के बाद बताया कि वह बहुत शर्मिंदा है। वह चाहता था कि चारों को मारकर अपनी जान भी दे दे, लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाया। इसके बाद उसकी आत्मा उसे धिक्कारने लगी। आलमगीर ने जब सब को मारा, तब हाथ नहीं कांपे, लेकिन बाद में सोचा तो रूह तक कांपने लगी, पूरा जिस्म थरथराने लगा।

उसने कहा कि वह लोगों के सामने कहना चाहता था कि उसने ही ये खून किए हैं, लेकिन उसके डर ने उसे ऐसा करने से रोक लिया। वह पुलिस से बोला कि अगर सबके सामने कह देता तो लोग उसे वहीं पर मार डालते। उसने कहा कि उसे सरेआम फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए।

उधर, पुलिस की तैयारी आलमगीर पर एनएसए के तहत कार्रवाई करने की है। वहीं, गांव के जिम्मेदार लोगों ने रमाला थाना पहुंचकर कहा है कि इस केस की कोई पैरवी नहीं करेगा। उसकी जमानत के लिए भी प्रयास नहीं किया जाएगा। उसने ऐसा गुनाह किया है, जिसके लिए बड़ी से बड़ी सजा भी छोटी है।
आलमगीर ने कत्ल बड़ी प्लानिंग के साथ किए। पुलिस ने बताया कि उसने अंडरवियर छोड़कर बाकी सारे कपड़े उतार दिए थे। ऐसा इसलिए किया ताकि उसके कपड़ों पर खून के दाग न आएं। अगर कपड़े खून से सन जाते तो भागते समय पकड़े जाने का डर रहता।

वह आसानी से पहचान में आ जाता कि खून उसने ही किए हैं। उसने खून करने के बाद घर में ही हथौड़ा और दरांती को पानी से साफ किया। जो कपड़े� उतारे थे, वे पहने और चेहरे पर लगे खून को साफ किया और हाथ भी धोए। फिर एक सफेद चादर ली और उसमें हथौड़ा और दरांती को छुपाया और चल दिया, लेकिन दलित बस्ती की ओर से जाते समय कुछ लोगों ने उसे देख लिया था।

सुबह छह बजे बस पकड़कर कांधला पहुंचा। वहां चुपचाप बैठा रहा। फिर अपने एक रिश्तेदार के पास पहुंच गया। उसके पास जब फोन आया कि उसकी पत्नी और बच्चों का कत्ल हो गया है तो वह किरठल के लिए चल दिया। इससे पहले उसने अपनी बस के कंडक्टर से कहा कि उसे उसकी मदद चाहिए।

उसे बताया कि अगर कोई पूछे कि वह कहां था, तो कह देना की बस में ही था। वह पुलिस से बचना चाहता था। उसने यह भी बताया कि उसका गाजियाबाद की एक महिला के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है। अगर हत्याकांड का खुलासा न होता तो वह उसके साथ थोड़े दिन में शादी कर लेता।

हां, मेरा बेटा गुनाहगार है - दलशेर
आलमगीर के पिता दलशेर का कहना है कि उसके बेटे ने ही कत्ल किए हैं, लेकिन वह इसकी वजह गलत बता रहा है। उसने कहा उसकी बहुत उम्र हो चुकी है, वह कभी अपनी पुत्रवधू के बारे में कुछ गलत सोच भी नहीं सकता। वह सात साल से अलग रहता है। आलमगीर को सजा ए मौत मिलनी चाहिए। वह अपनी करतूत पर परदा डालने के लिए उस पर झूठा इल्जाम लगा रहा है।

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