नई दिल्ली. आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को देश के तमाम बैंकों को जोरदार लताड़ लगाई. उन्होंने कहा कि रेपो रेट कम किए जाने के बावजूद इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है. आरबीआई ने अपनी उदार नीतिगत पहल के मुतबिक ऋणों पर ब्याज दर में कमी करने के लिए मंगलवार को बैंकों पर दबाव बनाया और कहा कि ऐसा जितनी जल्दी होगा अर्थव्यवस्था के लिए उतना ही अच्छा होगा.
राजन ने खासतौर पर सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई और निजी बैंक आईसीआईसीआई का नाम लेते हुए कहा कि दोनों ही बैंकों ने लोगों तक दरों में कटौती का लाभ नहीं पहुंचाया. उन्होंने बैंकों द्वारा दिए जा रहे खर्चे में कमी नहीं आने के तर्क को भी बेतुका करार दिया. उन्होंने कहा कि जब भी बैंकों को अपनी ब्याज दरें बढ़ानी होती हैं तब वे आरबीआई की ऊंची ब्याज दरों का बहाना लेते हैं. अब जब आरबीआई ने ब्याज दरें कम की हैं, तब बैंक दरें कम क्यों नहीं कर रहे?
आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने चालू वित्त वर्ष की पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाताओं से कहा कि नीतिग दर में कटौती का अब तक ब्याज दरों पर बहुत कम असर हुआ है. हम इसका असर फैलने का इंतजार कर रहे हैं. मुझे इसके होने में कोई संदेह नहीं है. पर यदि ऐसा जल्दी होता है तो यह अर्थव्यवस्था के बेहतर होगा. हालांकि आरबीआई ने जनवरी से अब तक दो बार में मुख्य दरों में 0.50 प्रतिशत की कटौती की है लेकिन बैंकों ने मुख्य दरों में कटौती का फायदा उपभोक्ताओं को नहीं दिया है.
राजन ने आज अपनी नीतिगत दरों को पिछले स्तर पर बरकार रखा लेकिन उम्मीद जताई कि प्रतिस्पर्धा के दबाव और धन की सहज स्थिति के चलते बैंक अपना कर्ज सस्ता करेंगे. उन्होंने कहा कि नकदी की आरामदेह स्थिति के मद्देनजर बैंकों को नीतिगत दरों में हालिया कटौती का फायदा उपभोक्ताओं को देना चाहिए जिससे ताकि अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण की स्थिति में सुधार हो. आरबीआई ने कहा कि वह आगे भी उदार मौद्रिक नीति बरकरार रखेगा. नीति में कहा गया कि रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में पहले की गई कटौती के प्रभाव में बैंकों की ब्याज दरों में कटौती का इंतजार करेगा.

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