Wednesday, 8 April 2015

चिंता की बात: गुजरात में बढ़ रही बैचलर्स की संख्या

गांधीनगर 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के सबसे लोकप्रिय बैचलर हो सकते हैं पर उनके राज्य में सेक्स रेशियो की असमानता ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। 
दरअसल गुजरात में 30-40 की उम्रवर्ग के पुरुषों की संख्या 6.29 लाख है, जो अभी कुंवारे हैं। ख़ास बात यह भी है कि इनमें से ज्यादातर पुरुष अपनी इच्छा से कुंवारे हैं। 

हैरानी की बात यह है कि राज्य में सेक्स अनुपात की हालत इसकदर असामान्य है कि 919 महिलाओं पर 1000 परुष और 0-6 उम्रवर्ग में 886 लड़कियों पर 1000 लड़के हैं। 

आलम यह है कि इस असमानता के चलते योग्यतम कुंवारों को दुल्हन ढूंढने के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। 

उदाहरण के तौर पर हरेश पटेल काफी शैक्षिक योग्यता रखते हैं। उनके नाम के साथ एमएससी, एमफिल, पीएचडी जैसी बड़ी डिग्रियां जुड़ी हैं।
वह जमींदार के बेटे हैं और अच्छा खासा कमाते हैं। संक्षिप्त में कहें तो वह पर्फेक्ट कुंवारे हैं और शायद आगे भी जीवनसाथी न मिल पाने के चलते कुछ वक्त तक कुंवारे रहें। हरेश कहते हैं कि ऐसा कोई मैरेज ब्यूरो नहीं बचा, जहां उन्होंने खुद को रजिस्टर न कराया हो। वह कहते हैं कि वे अक्सर विवाह सम्मेलनों में भी जाते रहे हैं पर उन्हें अपना जीवनसाथी अब तक नहीं मिला है। 
सेंसस के मुताबिक जहां 30-40 उम्रसीमा के भीतर कुंवारी महिलाओँ की संख्या 2.6 लाख है वहीं इस उम्रवर्ग में पुरुषों की संख्या कहीं ज्यादा है।

हाल में ही सीएजी ने 2103-14 की अपनी रिपोर्ट में राज्य में लड़कियों के घटते अनुपात पर चिंता जताई है। महिला और बाल विकास विभाग की अपने रिपोर्ट में सीएजी का कहना है कि जब पूरे देश में लड़कों के मुकाबले लड़कियों का अनुपात 933 से बढ़कर 943 हो गया, ऐसे में गुजरात में ये 920 से घटकर 919 हो गया है, जो चिंता की बात है।

सीएजी के मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ है की खर्च होने के बावजूद सही दिशा में काम नहीं हो रहा है। जानकारों का कहना है कि सेक्स रेशियो में सुधार इसलिए भी नहीं हो पा रहा है क्योंकि सरकार पैसे तो खर्च कर रही है लेकिन प्रयास सही दिशा में नहीं हो रहे हैं। 

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