Sunday, 29 March 2015

J&K: बॉर्डर से 3 किलोमीटर दूर बैठे फिदायीन आतंकवादी हमले की ताक में

पाकिस्तान से सटे जम्मू-कश्मीर में इंटरनेशनल बॉर्डर से महज तीन किलोमीटर दूर लश्कर के फिदायनी आतंकवादियों ने अपना गढ़ बना लिया है और हमले की फिराक में है। खुफिया एजेंसियों ने इस संबंध में सतर्क करते हुए भारतीय फौजों को आगाह किया है कि लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने यहां अपना बेस बना लिया है। भारत के लिहाज से सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि तीन किलोमीटर दूर आतंकियों के इन कैंपों का मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफीज सईद दौरा कर रहा है और आतंकियों को दिशा-निर्देश दे रहा है। हाल में ही जम्मू में कई सुरक्षा ठिकानों पर हमला आतंकियों के इसी रणनीति का हिस्सा है।
बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने हाल में हुई घुसपैठ की घटनाओं के आधार पर यह रिपोर्ट बनाई है। होम मिनिस्ट्री को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू सीमा से तीन किलोमीटर पाकिस्तान की जमीन पर आतंकियों ने 'टेरर लॉन्च पैड्स' बनाए हैं।
बीएसएफ ने की है दस कैंपों की पहचान
सूत्रों का कहना है कि सीमा इलाके में ऐसे 10 कैंपों की पहचान की गई है जहां पर प्रशिक्षित आतंकी घरों में पनाह लिए हुए हैं और वे भारत पर हमले से पहले किसी बड़े हमले के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
जम्मू सीमा से पाकिस्तान के बड़ा भाई मसूर, अभिअल डोगरा, चापरार, सुखमल और चरकभुरा इलाके सटे हुए हैं जहां आतंकी लश्कर के कैंपों में बसे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन आतंकियों को पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में ट्रेनिंग के बाद यहां लाया गया और उन्हें किसी बड़े हमले से पहले स्टैंड बाई पर रखा गया है। सीमा के इतने करीब इन आतंकियों को पाकिस्तानी जमीन पर पनाह देने का मतलब है कि ये अपने आकाओं का आदेश मिलते ही तुरंत हमले को तैयार होंगे।
जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की सीमा से सटे जम्मू के तमाम इलाकों में फेंसिंग (तार से घेराबंदी) हो चुकी है लेकिन सात किमी का ऐसा इलाका है जहां आज तक फेंसिंग नहीं हो पाई है। यहां एक बड़ा नाला है जिसके कारण अभी तक फेंसिंग में दिक्कतें हुई हैं।
पाक कब्जे वाले कश्मीर में ट्रेनिंग लेकर आए हैं आतंकी
जम्मू सीमा से पाकिस्तान के बड़ा भाई मसूर, अभिअल डोगरा, चापरार, सुखमल और चरकभुरा इलाके सटे हुए हैं जहां आतंकी लश्कर के कैंपों में बसे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन आतंकियों को पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में ट्रेनिंग के बाद यहां लाया गया और उन्हें किसी बड़े हमले से पहले स्टैंड बाई पर रखा गया है। सीमा के इतने करीब इन आतंकियों को पाकिस्तानी जमीन पर पनाह देने का मतलब है कि ये अपने आकाओं का आदेश मिलते ही तुरंत हमले को तैयार होंगे।
रिपोर्ट में इस बात की चेतावनी दी गई है, ''टीटीपी और लश्कर के 12-15 आतंकियों का समूह जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधयों को अंजाम देने के लिए योजना बना रहा है।'' पहले भी इस प्रकार की रिपोर्ट आ चुकी है जिसमें लश्कर के फिदायनी आतंकियों के अलावा तहरीक-ए-तालिबान के आतंकियों के भी सीमा पार कैंप बनाने की खबरें थीं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 60 आतंकी सीमा पार मोर्चा संभाले हुए हैं। बता दें कि पिछले वर्ष पाकिस्तानी सीमा से सटे इलाकों में पाक रेंजर्स की मदद से घुसपैठ की कई घटनाएं हुई थीं। इसी कारण कई बार सीमा पार से सीजफायर का उल्लंघन भी किया गया है। अरनिया, पहारपुरा, संबा, कठुआ, अखनूर में घुसपैठ की कई घटनाएं हुईं हैं। सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें बढ़ीं हैं। बीएसएफ की रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू सीमा से सटे इलाकों में पिछले दो महीनों में घुसपैठ की आठ बड़ी घटनाओं को जवानों ने नकाम किया है।

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