केंद्र सरकार ने उस आदेश को फिलहाल टाल दिया है, जिसके तहत सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों की पैकिंग के 85 फीसदी हिस्से पर तस्वीर के जरिए इसके दुष्परिणाम से संबंधित वॉर्निंग छापी जानी थी। यह आदेश 1 अप्रैल से लागू होना था। दरअसल, एक संसदीय कमेटी ने सिफारिश की थी कि उसे तंबाकू किसानों पर इस फैसले द्वारा पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए समय की जरूरत है।
इस कमेटी के चेयरपर्सन बीजेपी सांसद दिलीप कुमार गांधी चाहते हैं कि केंद्र सरकार खुद एक स्टडी करे, जिससे साबित हो कि तंबाकू की वजह से कैंसर होता है। गांधी का कहना है, ''कोई भी भारतीय सर्वे रिपोर्ट नहीं है, जिससे साबित हो कि तंबाकू के इस्तेमाल से कैंसर होता है। सारी की सारी स्टडीज विदेशों में की गई है। कैंसर सिर्फ तंबाकू की वजह से नहीं होता। हमें भारतीय परिप्रेक्ष्य में स्टडी करना होगा। इसकी वजह यह है कि मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के चार करोड़ से ज्यादा लोग बीड़ी व्यवसाय से जुड़े हैं।'' गांधी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे एक पत्र में सिफारिश की है कि जब तक इस फैसले के तंबाकू व्यवसाय से जुड़े लोगों पर असर का अध्ययन नहीं कर लिया जाता, इसे टाल दिया जाए।
बता दें कि देश मे तंबाकू से होने वाली बीमारियों से सालाना करीब 9 लाख लोगों की मौत होती है। तंबाकू की वजह से होने वाली मौत के मामले में भारत पड़ोसी मुल्क चीन के बाद दूसरे नंबर पर आता है। जानकार मानते हैं कि 2020 तक भारत में तंबाकू जनित रोगों से मरने वालों की संख्या 20 लाख तक होगी। पिछले साल नवंबर में जब भारत सरकार ने सिगरेट खरीदने की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर 25 साल और खुली सिगरेट बेचने पर रोक लगाने की बात कही थी, तो इस फैसले का काफी स्वागत हुआ था। इस योजना को स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने संसद में रखा था, लेकिन सरकार अभी तक इस पर आगे नहीं बढ़ पाई है।

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