Tuesday, 31 March 2015

जो पीता है इस गांव का पानी हो जाता है विकलांग, जानवरों का भी यही है हाल

नवादा. बात 15 दिनों पहले की है। बिहार के नवादा जिले के रजौली प्रखंड के कचहरियाडीह निवासी कारू राजवंशी की गाय ने एक बछड़े को जन्म दिया। वह विकलांग पैदा हुआ। दूषित जल के सेवन की भयावहता का यह ताजी कड़ी है। दूषित जल के सेवन से डेढ़ दशक पहले कारू और उसकी पत्नी विकलांग हो गई थी। उनके दो स्वस्थ्य पुत्र पैदा हुए, लेकिन 10 साल की उम्र में ही उनके पुत्र शिवबालक (16 वर्ष) और गोवर्धन (14 वर्ष) विकलांग हो गए। तीन साल पहले कारू ने एक गाय खरीदी थी, लेकिन अब जब गाय ने बछड़े को जन्म दिया, तो वह विकलांग पैदा हुआ। दरअसल, विकलांगता की यह समस्या सिर्फ कारू परिवार तक सीमित नहीं है। कचहरियाडीह के शत प्रतिशत लोगों की कहानी है, जो विकलांगता का अभिशाप झेल रहे हैं। स्थिति यह थी कि यहां जो भी पानी का सेवन करता है वो या तो विकलांग हो जाता है या उसे कोई गंभीर बीमारी हो जाती है। किसुन भूइयां का 20 वर्षीय पुत्र संतोष विकलांगता का शिकार है। उसका पूरा शरीर टेढ़ा हो गया है। कपिल राजवंशी, पंकज, विमला, ममता, नरेश, सरोज, पूजा, संगीता, सुशील जैसे दर्जनों ग्रामीण हैं, जिनका जीवन ऐसा है।
प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ शत्रुघ्न प्रसाद सिंह कहते हैं कि आमतौर पर पानी में डेढ़ फीसदी फ्लोराइड की मात्रा पाई जाती है। जांच में कचहरियाडीह गांव में आठ फीसदी फलोराइड की मात्रा पाई गई है। लिहाजा, ग्रामीण फलोरोसिस नामक रोग के शिकार हो जाते हैं। इस रोग से बच्चों का अंग टेढ़ा होने लगता हडि्डयां चौकोर होने लगती हैं। 15-16 साल की अवस्था में ही लोग बुढ़ापा का अनुभव करने लगते हैं।
पानी टंकी भी कारगर नहीं
हालांकि, इस रोग से बचाव के लिए हरदिया पंचाचत में पानी टंकी का निर्माण कराया गया है। प्रभावित ग्रामीणों को विस्थापित भी किया गया है, लेकिन गांववालों की परेशानी खत्म नहीं हो रही है। लोक-स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रदुम्न शर्मा कहते हैं कि ग्रामीणों को शुद्ध पानी की व्यवस्था कराई जा रही है।

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