Tuesday, 31 March 2015

मोदी ने रेलमंत्री से पूछा- क्‍यों लेट होती हैं ट्रेनें, अफसर देख रहे 1975 की फाइलें

 ट्रेनों के लेट चलने के कारण प्रधानमंत्री मोदी नाराज हैं। उन्होंने रेल मंत्री सुरेश प्रभु से इसके बारे में जवाब मांगा है। इसके बाद रेल मंत्रालय के अफसर इमरजेंसी के दिनों (1975) की फाइलें खंगाल रहे हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि पब्लिक की ओर से मिली कुछ शिकायतों में कहा गया है कि आपातकाल के दिनों में ट्रेनें समय से चला करती थीं। पीएमओ की सख्ती के बाद रेल मंत्री प्रभु ट्रेनों की टाइमिंग को लेकर रोजाना समीक्षा कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को ट्रेनों के देरी से चलने के बारे में सांसदों और आम लोगों से शिकायतें मिल रही हैं। इसके बाद पीएमओ ने रेल मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा। एक अधिकारी के मुताबिक, रेलवे से कहा गया है कि आपातकाल के दौरान ट्रेनें 90 फीसदी तक सही समय पर चलती थीं, इसलिए अब हम उस दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले सिस्टम का अध्ययन करने के लिए पुरानी फाइलें खंगाल रहे हैं। कुछ शिकायतों में आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इमरजेंसी के दौरान ट्रेनें सही समय पर चलती थीं।
बताया जाता है कि ट्रेनों की लेट लतीफी को लेकर रेलवे बोर्ड मेंबर (ट्रैफिक) अजय शुक्ला ने सभी जोनल रेलवे प्रबंधकों को पत्र लिखकर चेतावनी दी है। इसमें कहा गया है कि वे देरी से चलने वाली ट्रेनों को लेकर बनाए जा रहे बहानों से बाज आएं। ये आंकड़े मैन्युअली तैयार किए जाते हैं और माना जाता है कि संबंधित अधिकारी इस बारे में सही जानकारी नहीं देते। इस पत्र में कहा गया है कि अगर ट्रेनों का देरी से चलना जारी रहा तो संबंधित अधिकारी को सस्पेंड किया जा सकता है या फिर उसका तबादला किया जा सकता है। शुक्ला के इस कदम के बाद हालात में सुधार आया है। मार्च 2014 में 84.43 ट्रेनों का संचालन सही समय पर हुआ था जबकि इस साल यह आंकड़ा 79 फीसदी ही रहा।
उत्तर रेलवे जोन में हालात सबसे ज्यादा खराब
उत्तर रेलवे में हालात ज्यादा खराब हैं। यहां पिछले साल मार्च में ट्रेनों के समय पर चलने का आंकड़ा 82 प्रतिशत था जो अब 60 पर आ गया है। ट्रेनों के समय पर ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार ट्रैफिक डायरेक्टोरेट ने ट्रेनों के लेट होने के लिए कई कारणों का हवाला दिया है। इनमें सिग्नल्स की खराबी, चलती ट्रेनों को बार-बार रोका जाना और ओवरहेड इलेक्ट्रिक सिस्टम में दिक्कत शामिल हैं।
कुछ साल पहले ट्रेनों में ऑटोमैटिक ‘डाटा लॉगर’ का इस्तेमाल शुरू किया गया था। इसकी मदद से ट्रेनों के रनिंग स्‍टैटस से जुड़ा डाटा ऑटोमैटिकली रिकॉर्ड होता है। इस सिस्‍टम को देश भर में लागू किया जाना था, पर काफी लागत के चलते नहीं किया गया। इसलिए मुगलसराय जैसे व्‍यस्‍ततम रूट को छोड़ कर बाकी रूट्स पर डाटा रिकॉर्ड करने का काम मैनुअली ही किया जाता है। इस वजह से भी ट्रेनों के देरी से चलने का सही कारण पता नहीं लग पाता।

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