Friday, 8 May 2015

दलित विद्वानों की क्यों नही होती पूजा : मांझी


दलितों के उत्‍थान में लगे जीतनराम मांझी, बोले आखिर पंडित की क्‍यों दलित की पूजा क्‍यों नहीं ?

पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी हमेशा सुर्खियों में छायें रहे है और इस ज्यादातर विवादित बयानों के कारण चर्चा के विषय मे रहते है। इस बार तो मांझी ने समाज में दलितों के साथ होने वाले ऊंच-नीच के सम्बन्धों पर विवादित बयान बोलकर चर्चा में आए है। मांझी ने सीधें-सीधें बोला है कि ब्राह्मणों और दलितों की विद्वता को एक तराजू में मापा जाना चाहिए। मांझी ने यह भी बोला है कि इस व्यवस्था में परिवर्त लाना बहुत आवश्यक है। मांझी ने कहा है कि ब्राह्मण गाली दे, श्राप दे, मारपीट करे, भष्ट्र हो, फिर भी उसे पूजा जाता है, लेकिन दलित कितना भी विद्वान या कितना भी ईमानदार फिर भी उसकी पूजा नहीं कि जाती है। 
हम घर में कोई भी कार्यक्रम करते है तो पंडितों को क्यों आमंत्रित करते है विद्धान को ही क्यों नही। किसी कार्य में पूजा करवाने के लिए पंडित को ही बुलाया जाता है। किस कर्म की वजह से हमें दासता की जंजीर में जकड़ा जाता है। हम सभी को यह समझना चाहिए कि जो शक्ति उनके पास है, वही शक्ति मेरे पास भी है। लोग हमें नीच कहकर तों नीची जाती का बता देते है लेकिन हम ब्राह्मणों को घर में पूजा के लिए बुलाते है। इस प्रकार की व्यवस्था में परिवर्तन लाना बहुत ही आवश्यक है।'
मांझी बेगूसराय के बछवाड़ में चैहरमल पूजा में भाग लेने के बाद जनता को संबोधित कर रहे थे। मांझी ने यह भी कहा है कि 8 मई को पटना में उनकी नई पार्टी 'हम' की एक मीटिंग का आयोजन होगा, जिसमें पार्टी की नई समिति का दोबारा से निर्माण होगा। इसी मीटिंग में राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री, सहित कई पदाधिकारी बनाए जाएंगे और 10 मई को पार्टी को आधिकारिक रूप से शुरू किया जाएगा।

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