पिछले 25 अप्रैल और उसके बाद आए भूकंप के झटकों की दहशत अभी कम भी नहीं हुई थी कि मंगलवार को आए एक के बाद एक झटकों ने एक बार फिर तबाही मचा दी। इन झटकों से बिहार में जहां 51 लोगों की मौत हो गई वहीं नेपाल में 28 की जान चली गई। सैकड़ों लोग घायल हो गए। नेपाल में कई इमारतें ध्वस्त हो गईं।
नेपाल की धरती से मंगलवार की दोपहर 12.35 बजे रिक्टर स्केल पर 7.3 की तीव्रता से भूकंप आया जिससे समूचा बिहार कांप गया। इसके बाद कई आफ्टर शॉक आए। पहला आफ्टर शॉक दोपहर करीब 1.10 बजे आया, जिसकी तीव्रता 5.6 थी। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक आरके गिरि के मुताबिक दोपहर 12.35 पर 7.3 की तीव्रता से आया भूकंप 40 से 42 सेकेंड तक रहा।
नेपाल की धरती से मंगलवार की दोपहर 12.35 बजे रिक्टर स्केल पर 7.3 की तीव्रता से भूकंप आया जिससे समूचा बिहार कांप गया। इसके बाद कई आफ्टर शॉक आए। पहला आफ्टर शॉक दोपहर करीब 1.10 बजे आया, जिसकी तीव्रता 5.6 थी। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक आरके गिरि के मुताबिक दोपहर 12.35 पर 7.3 की तीव्रता से आया भूकंप 40 से 42 सेकेंड तक रहा।
इस भूकंप का केंद्र भी 25 अप्रैल को आए भूकंप के केंद्र से दो-चार किलोमीटर के अंदर ही है। सतह से 10 किमी नीचे इसका केंद्र था। भूकंप के बाद जो पहला आफ्टर शॉक आया वह करीब 19 सेकेंड तक रहा। शाम 5.45 बजे तक दस आफ्टर शॉक आ चुके थे।
बिहार में भूकंप से सबसे अधिक सीतामढ़ी में पांच लोगों की जान गई। दरभंगा व मुजफ्फरपुर में दो-दो और समस्तीपुर व पश्चिम चम्पारण में एक-एक की मौत हुई। वहीं पटना में चार, छपरा में तीन, सीवान-गोपालगंज में दो-दो और नवादा, शेखपुरा, औरंगाबाद तथा वैशाली में एक-एक की मौत हुई। उधर मधेपुरा में दो और अररिया व किशनगंज में भी एक-एक की जान गई। हालांकि बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य में सात लोगों के मरने और 24 के घायल होने की पुष्टि की है।
मौसम विज्ञान केंद्र के सीनियर निदेशक एके सेन ने लोगों को 48 घंटे तक अलर्ट रहने को कहा है। कमजोर और क्षतिग्रस्त मकानों में नहीं रहने की सलाह दी है। कहा है कि आफ्टर शॉक पहले के मुकाबले कम क्षमता का होने के बाद भी रिक्टर स्केल पर छह तक जा सकता है।
बिहार में भूकंप से सबसे अधिक सीतामढ़ी में पांच लोगों की जान गई। दरभंगा व मुजफ्फरपुर में दो-दो और समस्तीपुर व पश्चिम चम्पारण में एक-एक की मौत हुई। वहीं पटना में चार, छपरा में तीन, सीवान-गोपालगंज में दो-दो और नवादा, शेखपुरा, औरंगाबाद तथा वैशाली में एक-एक की मौत हुई। उधर मधेपुरा में दो और अररिया व किशनगंज में भी एक-एक की जान गई। हालांकि बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य में सात लोगों के मरने और 24 के घायल होने की पुष्टि की है।
मौसम विज्ञान केंद्र के सीनियर निदेशक एके सेन ने लोगों को 48 घंटे तक अलर्ट रहने को कहा है। कमजोर और क्षतिग्रस्त मकानों में नहीं रहने की सलाह दी है। कहा है कि आफ्टर शॉक पहले के मुकाबले कम क्षमता का होने के बाद भी रिक्टर स्केल पर छह तक जा सकता है।
आफ्टर शॉक की तीव्रता कम होने के साथ ही समयावधि भी कम ही रहेगी। इस बार धरती के अधिक डोलने के सवाल पर कहा कि संभव है कि इस भूकंप का रेडियल वेब अधिक रहा है, वैसे यह अध्ययन के बाद ही स्पष्ट किया जा सकता है।
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