Tuesday, 12 May 2015

भूकंप से सहमे लोग, ताजा स्थिति पर पीएम ले रहे हैं हाई लेवल मीटिंग


PHOTOS: भूकंप के झटकों से सहमे लोग, खाली कराए गए शहर के सरकारी दफ्तर

दिल्ली : राजधानी में मंगलवार को दोपहर 12.38 बजे भूकंप के हल्के झटकों को महसूस किया गया। इस भूकंप का केंद्र नेपाल की राजधानी काठमांडू से पूर्व की ओर है। भूकंप की तीव्रता 7.3 है। मौसम विभाग के निदेशक अनुपम काश्यपि ने बताया कि भोपाल में जो झटके हैं, वह आफ्टर शॉक हैं। मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार सोमवार की रात 8.21 बजे भी भूकंप के आफ्टर शॉक महसूस किए गए थे, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.9 थी।
मौसम विभाग के अनुसार, भूकंप का केंद्र, लैटीट्यूड 27.6 डिग्री नार्थ और लांगीट्यूड 86.0 ईस्ट पर है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.3 है। यह भूकंप अपने एपीसेंटर से 18 किमी गहराई में आया है। भूकंप की ड्यूरेशन 95 सेकंड तक रही। मप्र में सभी जगह धरती हिली है लेकिन नुकसान कहीं नहीं हैं। भोपाल में रिक्टर स्केल पर 3.9 तीव्रता के झटके महसूस हुए।
भूकंप का असर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत पूरे राज्य और पड़ोसी प्रदेश छत्तीसगढ़ में भी दिखाई दिया। हालांकि कहीं से भी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। जिस वक्त भूकंप आया मंत्रालय में कैबिनेट बैठक चल रही थी। झटके महसूस होते ही मंत्रालय के कर्मचारी एवं मंत्री सीढ़ियों से होते हुए मंत्रालय से बाहर भागे। इस बीच सीएम ने आदेश जारी करते हुए कहा कि स्थिति सामान्य होने तक कोई भी सरकारी दफ्तर में काम नहीं करेगा। सुरक्षा की दृष्टि से
मंत्रालय, सतपुड़ा भवन और विंध्याचल भवन सहित शहर के सारे सरकारी दफ्तर खाली करा लिए गए।
अलर्ट जारी कर दिया है
भोपाल में भूकंप की जानकारी आते ही मप्र के बाकी हिस्सों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। भूकंप संवेदी जोन-3 नर्मदा वैली में विशेष सावधानी रखी जा रही है। अभी तक प्रदेश के किसी भी इलाके से हमें जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं आई है। मंत्रालय को जरुर खाली करा लिया गया है।
संतोष कुमार जाट, कमांडेंट, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स
भूकंप का कहां है केंद्र
बीबीसी हिन्दी के अनुसार भारत भी अब भूकंप का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। भू-वैज्ञानिकों ने बताया कि भूकंप का खतरा देश में हर जगह अलग-अलग है। इस खतरे के हिसाब से देश को चार हिस्सों में बांटा गया है, जैसे जोन-2, जोन-3, जोन-4 तथा जोन-5। सबसे कम खतरे वाला जोन-2 है, तथा सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन-5 है।

जोन-एक: पश्चिमी मध्यप्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और उड़ीसा के हिस्से आते हैं। यहां भूकंप का सबसे कम खतरा है।

जोन-दो: तमिलनाडु, राजस्थान और मध्यप्रदेश का कुछ हिस्सा, पश्चिम बंगाल और हरियाणा। यहां भूकंप की संभावना रहती है।

जोन-तीन: केरल, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, पश्चिमी राजस्थान, पूर्वी गुजरात, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश का कुछ हिस्सा आता है। इस जोन में भूकंप के झटके आते रहते हैं।

जोन-चार : मुंबई, दिल्ली जैसे महानगर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी गुजरात, उत्तरांचल, उत्तरप्रदेश के पहाड़ी इलाके और बिहार-नेपाल सीमा के इलाके शामिल हैं। यहां भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है और रुक-रुक कर भूकंप आते रहते हैं।

जोन-पांच : भूकंप के लिहाज से ये सबसे खतरनाक इलाका है। इसमें गुजरात का कच्छ इलाका, उत्तरांचल का एक हिस्सा और पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्य शामिल हैं।

विभिन्न रिएक्टर स्केलों पर भूकंप

रिएक्टर स्केल के अनुसार 2.0 की तीव्रता से कम वाले भूकंपीय झटकों की संख्या रोजाना लगभग आठ हजार होती है, जो इंसान को महसूस ही नहीं होते।

2.0 से लेकर 2.9 की तीव्रता वाले लगभग एक हजार झटके रोजाना दर्ज किए जाते हैं, लेकिन आम तौर पर ये भी महसूस नहीं होते।

रिएक्टर स्केल पर3.0 से लेकर 3.9 की तीव्रता वाले भूकंपीय झटके साल में लगभग 49 हजार बार दर्ज किए जाते हैं, जो अक्सर महसूस नहीं होते, लेकिन कभी-कभार ये नुकसान कर देते हैं।

4.0 से 4.9 की तीव्रता वाले भूकंप साल में लगभग 6200 बार दर्ज किए जाते हैं। इस वेग वाले भूकंप से थरथराहट महसूस होती है और कई बार नुकसान भी हो जाता है।

5.0 से 5.9 तक का भूकंप एक छोटे क्षेत्र में स्थित कमजोर मकानों को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाता है, जो साल में लगभग 800 बार महसूस होता है।

6.0 से 6.9 तक की तीव्रता वाला भूकंप साल में लगभग 120 बार दर्ज किया जाता है और यह 160 किलोमीटर तक के दायरे में काफी घातक साबित हो सकता है।

7.0 से लेकर 7.9 तक की तीव्रता का भूकंप एक बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है और जो एक साल में लगभग 18 बार दर्ज किया जाता है।

रिएक्टर स्केल पर 8.0 से लेकर 8.9 तक की तीव्रता वाला भूकंपीय झटका सैकड़ों किलोमीटर के क्षेत्र में भीषण तबाही मचा सकता है, जो साल में एकाध बार महसूस होता है।

9 .0 से लेकर 9.9 तक के पैमाने का भूकंप हजारों किलोमीटर के क्षेत्र में तबाही मचा सकता है, जो 20 साल में लगभग एक बार आता है।

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